Koderma: नई दिल्ली-हावड़ा ग्रेड कोड सेक्सन के अंतर्गत धनबाद रेलमंडल के गया-कोडरमा रेल सेक्शन के गुरपा-गझंडी घाट रेलखंड स्थित 120 वर्ष से अधिक पुरानी 3 सुरंगों (टनल) को और अधिक सुरक्षित और मजबूत बनाने की दिशा में रेलवे ने महत्वपूर्ण पहल शुरू कर दी है. धनबाद रेल मंडल रेल मार्ग पर स्थित इन ऐतिहासिक सुरंगों के सुदृढ़ीकरण और संरचनात्मक मजबूती के लिए विस्तृत योजना तैयार की जा रही है. इस कार्य के पूरा होने से रेल परिचालन की सुरक्षा, संरक्षा और क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी. पूर्व मध्य रेलवे के जीएम छतसाल सिंह और धनबाद मंडल के डीआरएम अखिलेश कुमार मिश्रा ने हाल ही में गुरपा-गझंडी घाट सेक्शन का निरीक्षण कर 3 सुरंगों की स्थिति और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया. निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने तकनीकी विशेषज्ञों के साथ सुरंगों की वर्तमान संरचना, रखरखाव व्यवस्था और भविष्य की आवश्यकताओं पर चर्चा की.
1906 में अंग्रेजों ने कराया था निर्माण
6 दिसंबर वर्ष 1906 में ब्रिटिश शासनकाल के दौरान निर्मित इन 3 सुरंगों ने रेलवे के इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. सुरंगों की लंबाई क्रमशः लगभग 4.96 किलोमीटर, 4.54 किलोमीटर और 3.95 किलोमीटर बताई जाती है. लंबे समय तक इन सुरंगों में जल रिसाव और चट्टानों से पत्थर गिरने जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं. हालांकि, रेलवे द्वारा समय-समय पर किए गए रखरखाव और तकनीकी उपायों के कारण समस्याओं पर काफी हद तक नियंत्रण किया गया है.

वहीं, अब विशेषज्ञों की तकनीकी सहायता से सुरंगों के विस्तार, पुनर्रचना और अतिरिक्त सुदृढ़ीकरण का कार्य किया जाएगा, जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार की संरचनात्मक चुनौती का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके.
टनल विस्तार से बढ़ी मालगाड़ियों की क्षमता, यात्रियों को भी लाभ
रेल अधिकारियों के अनुसार सुरंगों की गोलाई और डाइमेंशन में पूर्व में किए गए सुधारों के कारण भारी बीओबीआर कोयला रेकों का नियमित परिचालन संभव हो सका है. गया-कोडरमा रेलखंड देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में शामिल है, जहां इन सुरंगों से होकर प्रतिदिन अप और डाउन लाइन पर करीब 300 यात्री व मालगाड़ियां गुजरती हैं. रेलवे का मानना है कि सुरंगों के प्रस्तावित सुदृढ़ीकरण से न केवल रेल परिचालन अधिक सुरक्षित होगा, बल्कि माल परिवहन क्षमता में भी वृद्धि होगी. इससे यात्रियों की सुरक्षा, समयबद्ध रेल संचालन और माल ढुलाई की दक्षता को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा.
रेलवे अधिकारियों का बयान
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि यह परियोजना भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार की जा रही है, ताकि आने वाले वर्षों में भी यह महत्वपूर्ण रेलखंड सुरक्षित और सुचारु रूप से संचालित होता रहे.
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