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हजारीबाग कृषि विभाग में अधिकारियों की अनुपस्थिति से किसान परेशान

Hazaribagh: यह कहानी उस व्यवस्था की है, जो फाइलों में तो अन्नदाताओं के कल्याण के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन हकीकत की...

तीन महीने से दफ्तर में पसरा सन्नाटा, न फोन उठता है न फरियाद सुनी जाती है
तीन महीने से दफ्तर में पसरा सन्नाटा, न फोन उठता है न फरियाद सुनी जाती है

Hazaribagh: यह कहानी उस व्यवस्था की है, जो फाइलों में तो अन्नदाताओं के कल्याण के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन हकीकत की जमीन पर खुद लाचार और बेपरवाह नजर आती है. एक तरफ सरकार किसानों की समस्याओं के त्वरित समाधान और कृषि विकास को लेकर नित नई योजनाओं की घोषणाएं कर रही है, वहीं हजारीबाग जिले में कृषि विभाग (Agriculture Department) का दफ्तर खुद एक बड़ी समस्या बन चुका है. अपनी फसलों को बचाने, खाद-बीज की किल्लत दूर करने और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की उम्मीद लेकर जब जिले के दूर-दराज के गांवों से किसान यहां पहुंचते हैं, तो उन्हें साहब के केबिन में सिर्फ सूनापन दिखाई देता है. जैसा कि चित्र में साफ देखा जा सकता है, ये खाली पड़ी कुर्सियां और सूनी मेजें हजारीबाग कृषि विभाग की जमीनी कार्यप्रणाली की पूरी हकीकत बयां कर रही हैं.

तीन महीने से दफ्तर में पसरा सन्नाटा

इस प्रशासनिक अनदेखी के पीछे का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि जिले के किसानों की तकदीर का फैसला करने वाली जिला कृषि पदाधिकारी (District Agriculture Officer) डॉ. राय मनी हेम्ब्रोम पिछले करीब तीन महीनों से नियमित रूप से कार्यालय नहीं आ रही हैं. किसानों का आरोप है कि जब वे अपनी गंभीर समस्याओं को लेकर जिला मुख्यालय स्थित इस दफ्तर के चक्कर काटते हैं, तो उन्हें जिम्मेदार अधिकारी की अनुपस्थिति के कारण हर बार मायूस होकर लौटना पड़ता है. हद तो तब हो जाती है, जब परेशान होकर किसान या अन्य लोग उनसे फोन पर संपर्क करने की कोशिश करते हैं, लेकिन उनकी ओर से कोई फोन कॉल रिसीव नहीं किया जाता. अधिकारी के इस रवैये से ऐसा प्रतीत होता है मानो व्यवस्था ने किसानों को उनके हाल पर ही छोड़ दिया हो.

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खाद-बीज की किल्लत के बीच भगवान भरोसे खेती

वर्तमान समय में जब किसानों को विभागीय सहयोग और सही मार्गदर्शन की सबसे अधिक जरूरत है, तब अधिकारी की यह लंबी अनुपस्थिति उनके घावों पर नमक छिड़कने जैसी है. खेतों में बुवाई का समय हो या फसलों की देखरेख का, किसानों के सामने बीज और खाद की किल्लत जैसी नई समस्याएं खड़ी हो रही हैं. इसके अलावा विभिन्न कल्याणकारी सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए भी उन्हें कृषि विभाग के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं. दफ्तर के कुछ कर्मचारियों ने दबी जुबान में स्वीकार किया है कि मैडम महीने में बमुश्किल एक या दो दिन ही कार्यालय आती हैं, जिसकी वजह से न सिर्फ आम जनता के काम रुके हुए हैं, बल्कि विभागीय योजनाओं की प्रगति, विकास कार्य और अन्य जरूरी प्रशासनिक कामकाज भी पूरी तरह ठप पड़ गए हैं.

कर्मचारियों ने भी मानी ढिलाई

कार्यालय के भीतर के हालात इतने खराब हो चुके हैं कि अब खुद अधीनस्थ कर्मचारी भी दबी जुबान में व्यवस्था की इस विफलता को स्वीकार करने लगे हैं. उनका कहना है कि जिला कृषि पदाधिकारी के पास विभाग से जुड़े कई बेहद महत्वपूर्ण कार्यों की सीधे जिम्मेदारी है, लेकिन उनके नियमित रूप से कार्यालय नहीं आने के कारण पूरी व्यवस्था पर इसका प्रतिकूल असर पड़ रहा है. इस पूरे मामले और किसानों के गंभीर आरोपों पर जब जिला कृषि पदाधिकारी डॉ. राय मनी हेम्ब्रोम का पक्ष जानने के लिए उनसे संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो हर बार की तरह इस बार भी उनका फोन नहीं उठा. बहरहाल, हजारीबाग के पीड़ित और आक्रोशित किसानों ने अब इस बेलगाम हो चुकी प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ उच्चाधिकारियों से शिकायत कर सीधे हस्तक्षेप और उचित कार्रवाई की गुहार लगाई है.

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