Ranchi : झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अभय कुमार द्विवेदी, जो पोटका के तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) के तौर पर अपनी कार्यशैली को लेकर विवादों में थे, को बड़ी राहत मिली है. अपने मातहत कर्मियों के साथ गाली-गलौज, धक्का-मुक्की और अभद्र व्यवहार जैसे गंभीर आरोपों में घिरे द्विवेदी को विभाग ने सख्त चेतावनी के साथ आरोपों से मुक्त कर दिया है.
सवालों के घेरे में BDO द्विवेदी
आरोप पत्र के अनुसार, द्विवेदी पर अपने ही दफ्तर के चार कर्मचारियों—बीआरपी, प्रखंड समन्वयक, शिक्षा प्रसार पदाधिकारी और नाजीर—के साथ बदसलूकी करने का गंभीर इल्जाम था. दफ्तर के भीतर गाली-गलौज और धक्का-मुक्की जैसी घटनाएं प्रशासनिक तंत्र की मर्यादा पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर रही थी.

काम का दबाव बनाम अमानवीय व्यवहार
स्पष्टीकरण में अभय कुमार द्विवेदी ने अपने व्यवहार को प्रशासनिक कड़ाई बताया है. उन्होंने दलील दी कि गरीबों का काम जल्दी निपटाने की सनक में वे लापरवाह कर्मियों पर अपना आपा खो बैठते थे. उन्होंने इसे क्षणिक रोष बताकर बचाव किया. हालांकि, उनके स्पष्टीकरण से यह साफ है कि कार्य के प्रति उनकी निष्ठा तो थी, लेकिन अनुशासन के नाम पर की गई अभद्रता ने उन्हें विभाग की नजर में संदिग्ध बना दिया था.
सरकार की दो-टूक : चेतावनी देकर छोड़ा
विभाग ने मामले की समीक्षा की और पाया कि मामला वित्तीय गबन का नहीं, बल्कि अहंकारी व्यवहार का था. चूंकि संबंधित कर्मियों के साथ मामले को सुलझा लिया गया है और अधिकारी ने भविष्य में सुचितापूर्ण व्यवहार’ करने का भरोसा दिया है, इसलिए सरकार ने इस मामले को बंद करते हुए द्विवेदी को भविष्य के लिए सख्त चेतावनी जारी की है.
ALSO READ : SP को हटाना सजा नहीं, हत्या के समय मौजूद पुलिसकर्मियों पर दर्ज कराएं प्राथमिकी : बाबूलाल


