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DSPMU: खेल विभाग में वित्तीय गड़बड़ी और महिला खिलाड़ियों के शोषण के खिलाफ आदिवासी छात्र संघ का उग्र प्रदर्शन

Ranchi: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU) परिसर में आज आदिवासी छात्र संघ (ACS) के बैनर तले छात्र-छात्राओं ने खेल विभाग में...

Ranchi: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU) परिसर में आज आदिवासी छात्र संघ (ACS) के बैनर तले छात्र-छात्राओं ने खेल विभाग में कथित अनियमितताओं को लेकर जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया. आक्रोशित छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और दोषियों पर तुरंत सख्त कार्रवाई करने की मांग उठाई. प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में काफी देर तक गहमागहमी का माहौल बना रहा.

दो बार दिया जा चुका है ज्ञापन, नहीं हुई कार्रवाई

आदिवासी छात्र संघ के अध्यक्ष ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि खेल विभाग से जुड़े इन गंभीर मामलों को लेकर संगठन पहले भी दो बार कुलपति (वीसी) को लिखित रूप में ज्ञापन सौंप चुका है. इसके बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे छात्रों में गहरा असंतोष है.

वित्तीय हेरफेर और शोषण के गंभीर आरोप

छात्र संघ ने खेल विभाग पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि:

* वित्तीय अनियमितता: खेल विभाग में खिलाड़ियों के नाम पर बड़े पैमाने पर फंड और पैसों का दुरुपयोग (वित्तीय हेरफेर) किया जा रहा है.

* गंभीर शोषण: महिला खिलाड़ियों के साथ कथित शोषण का बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है, जिसकी निष्पक्ष जांच होना बेहद जरूरी है.

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जांच रिपोर्ट दबाने का प्रयास

छात्र नेताओं ने बताया कि इन गंभीर आरोपों के सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा एक जांच समिति का गठन किया गया था. इस समिति के सामने कई छात्र-छात्राओं ने हिम्मत दिखाकर अपना पक्ष रखा और लिखित शिकायतें भी दर्ज कराईं. लेकिन करीब डेढ़ महीने (45 दिन) बीत जाने के बाद भी जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया है.

राज्यपाल तक पहुंचा मामला, उग्र आंदोलन की चेतावनी

छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन के उदासीन रवैये को देखते हुए इस पूरे मामले से राज्यपाल (कुलाधिपति) को भी अवगत कराया जा चुका है, लेकिन परिणाम अब तक शून्य रहा है. आदिवासी छात्र संघ ने विश्वविद्यालय प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस मामले की निष्पक्ष जांच पूरी कर दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में छात्र अपने इस आंदोलन को और अधिक उग्र व तेज करने के लिए बाध्य होंगे.

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