Lohardaga: लोहरदगा जिले के भंडरा प्रखंड अंतर्गत उदरूंगी पंचायत के हाटी गांव में ग्राम सभा द्वारा सर्वसम्मति से गांव की सीमा पर सूचना पट्ट (होर्डिंग/बोर्ड) लगाने का निर्णय लिया गया. ग्राम सभा ने इसे अपनी परंपराओं, धार्मिक विरासत, संस्कृति और सामुदायिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया. ग्रामीणों के अनुसार यह निर्णय भारतीय संविधान की पांचवीं अनुसूची तथा पेसा कानून के तहत ग्राम सभा को प्राप्त अधिकारों के अनुरूप लिया गया है.
ग्राम सभा को परंपराओं, सांस्कृतिक पहचान और सामुदायिक संपदा के संरक्षण का अधिकार प्राप्त
कार्यक्रम में उपस्थित IRS अधिकारी निशा उरांव ने कहा, कि भारतीय संविधान की पांचवीं अनुसूची, पेसा अधिनियम की धारा 4(घ) तथा पेसा नियमावली की धारा 23(1) के तहत ग्राम सभा को अपनी परंपराओं, सांस्कृतिक पहचान और सामुदायिक संपदा के संरक्षण का अधिकार प्राप्त है. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय तथा उसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने ग्राम सभा द्वारा लगाए गए ऐसे सूचना पट्ट को संवैधानिक रूप से वैध माना है. उनके अनुसार न्यायालयों के निर्णयों ने यह स्पष्ट किया है, कि ग्राम सभा अपने अधिकार क्षेत्र में स्थानीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए ऐसे निर्णय लेने की संवैधानिक शक्ति रखती है.

उन्होंने बताया कि ग्राम सभा द्वारा गांव की परंपराओं, सांस्कृतिक मूल्यों और सामुदायिक संसाधनों की सुरक्षा के उद्देश्य से सूचना पट्ट लगाने का निर्णय लिया गया था. इस निर्णय को न्यायालय में चुनौती दी गई थी, लेकिन छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने पेसा कानून की धारा 4(घ) का हवाला देते हुए ग्राम सभा के निर्णय को वैध ठहराया. बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस निर्णय को बरकरार रखते हुए ग्राम सभा के अधिकारों को संवैधानिक संरक्षण प्रदान किया.
ग्राम सभा स्थानीय स्वशासन की सबसे महत्वपूर्ण इकाई
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा, कि ग्राम सभा स्थानीय स्वशासन की सबसे महत्वपूर्ण इकाई है और अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा कानून के माध्यम से इसे विशेष अधिकार दिए गए हैं. इन अधिकारों का उद्देश्य आदिवासी समाज की परंपराओं, संस्कृति, सामाजिक व्यवस्था और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना है. ग्रामीणों ने कहा कि सूचना पट्ट केवल एक बोर्ड नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक एकजुटता और संवैधानिक अधिकारों का प्रतीक है.
सूचना पट्ट लगाने में स्थानीय सनातनी परिवारों ने भी बढ़-चढ़कर किया सहयोग
इस अवसर पर सरना और सनातन समाज की एकता भी चर्चा का प्रमुख विषय रही. ग्रामीणों ने कहा कि सूचना पट्ट लगाने के कार्य में स्थानीय सनातनी परिवारों ने भी बढ़-चढ़कर सहयोग किया. विशेष रूप से यादव और शाहदेव परिवारों के सदस्यों ने तन-मन और धन से सहयोग देकर सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे का संदेश दिया. वक्ताओं ने कहा कि यह पहल इस बात का उदाहरण है कि सरना और सनातन समाज के बीच सदियों पुराना सांस्कृतिक संबंध और पारस्परिक सम्मान आज भी मजबूत है. उन्होंने कहा कि समाज को विभाजित करने की कोशिशों का जवाब सामाजिक एकता और सहयोग से दिया जाना चाहिए.
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने ग्राम सभा के इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायी बताया. उन्होंने कहा कि गांव की परंपराओं, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा प्रत्येक ग्रामीण की जिम्मेदारी है और ग्राम सभा का यह कदम उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है.
बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे उपस्थित
इस अवसर पर IRS अधिकारी निशा उरांव, सनी टोप्पो, राजी पड़हा प्रार्थना सभा के सदस्य जलेश्वर उरांव, बिरसा उरांव, सुद्ध भगत, सोमे उरांव, सोमदेव उरांव, कृष्ण भगत, सुकेन्द्र उरांव, कांति उरांव एवं मानकी उरांव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे. गांव के ग्राम प्रधान एवं पाहन विद्यासागर पाहन, मंजन उरांव, प्रकाश उरांव, मनीष उरांव, लाल भीम शाहदेव, अनिल यादव, अमित यादव, आकाश यादव सहित अनेक ग्रामीणों ने कार्यक्रम में भाग लेकर ग्राम सभा के निर्णय के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया. ग्रामीणों ने विश्वास जताया कि ग्राम सभा के संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ने से स्थानीय स्वशासन और सामाजिक समरसता को और अधिक मजबूती मिलेगी.
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