Hazaribagh: कटकमदाग प्रखंड कार्यालय परिसर में आयोजित जनता दरबार में अंचल कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे. हल्का संख्या-10 के डूमर सरोनी (चोटियारो) निवासी रैयत दिलीप राणा ने आरोप लगाया कि उनकी पुश्तैनी जमीन को ऑनलाइन रिकॉर्ड में दर्ज कराने के लिए उन्हें पिछले पांच वर्षों से लगातार अंचल कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि अधिकारियों ने उन्हें बताया कि संबंधित मौजा का पंजी-2 (रजिस्टर-2) फट चुका है और अंचल कार्यालय से गायब या चोरी हो गया है.
चार कर्मचारी बदले, फिर भी नहीं हुआ जमीन का ऑनलाइन रिकॉर्ड
दिलीप राणा ने बताया कि मौजा डूमर में खाता संख्या-53 के अंतर्गत उनके 43 रैयती प्लॉट हैं. राज्य सरकार द्वारा भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण के दौरान उनकी जमीन का रिकॉर्ड ऑनलाइन पंजी-2 में दर्ज नहीं हो सका. इस त्रुटि को सुधारने के लिए वह लगातार अंचल कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं. उनका कहना है कि इस दौरान चार कर्मचारी बदल चुके हैं, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ.

रजिस्टर गायब होने की बात कहकर पल्ला झाड़ने का आरोप
पीड़ित का आरोप है कि जब भी वह मामले को लेकर अंचल अधिकारियों और कर्मचारियों से मिलते हैं, तो उन्हें बताया जाता है कि डूमर सरोनी मौजा का मूल पंजी-2 रजिस्टर फट चुका है और कार्यालय से गायब या चोरी हो गया है. उनका कहना है कि अधिकारियों ने यह कहकर असमर्थता जताई कि अब यह कार्य उनके स्तर से संभव नहीं है.
43 प्लॉटों के अधिकार को लेकर न्याय की गुहार
जनता दरबार में दिलीप राणा ने जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से न्याय की मांग की. उन्होंने कहा कि उनके पास जमीन से संबंधित सभी वैध दस्तावेज और खतियान उपलब्ध हैं. ऐसे में अंचल कार्यालय की लापरवाही का खामियाजा एक आम रैयत को नहीं भुगतना चाहिए. उन्होंने मांग की कि उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर जांच कर उनके सभी 43 प्लॉटों का ऑनलाइन रिकॉर्ड जल्द दर्ज कराया जाए, ताकि उन्हें अपनी पैतृक जमीन के अधिकार से वंचित न होना पड़े.
जांच का दिया गया आश्वासन
जनता दरबार में मौजूद अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शिकायत की जांच कराने और नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया.


