Ranchi : वन विभाग ने राज्य के वन प्रबंधन और वानिकी कार्यों में लगे हजारों दैनिक श्रमिकों के लिए राहत देने की कवायद शुरू कर दी है. वन प्रबंधन सुविधा योजना के अंतर्गत श्रमिकों की मजदूरी के लिए 23 करोड़ 27 लाख रुपये की राशि का आवंटन जारी कर दिया है. सरकार ने इस बार फंड जारी करने के साथ ही भ्रष्टाचार और लेटलतीफी को रोकने के लिए नियम सख्त कर कर दिया है. जारी आदेश में कहा गया है कि अब किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
दोहरीकरण और भ्रष्टाचार पर लगाम
सरकार ने इस बार स्पष्ट कर दिया है कि यह सरकारी खजाना श्रमिकों की मेहनत का फल है. इसमें किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या ‘डबल फंडिंग’ का खेल नहीं चलेगा. विभाग ने निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों को साफ निर्देश दिया है कि वे सुनिश्चित करें कि इस योजना का लाभ कैंपा, पलामू व्याघ्र परियोजना या हाथी परियोजना जैसी अन्य योजनाओं से न टकराए. अगर किसी कार्य के लिए दो स्रोतों से पैसा मिल रहा है, तो तत्काल निकासी रोकनी होगी. पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अब किसी भी परिस्थिति में नकद भुगतान नहीं होगा. पूरी राशि केवल डीबीटी DBT या सीधे बैंक-डाकघर खातों में ही हस्तांतरित की जाएगी.

मजदूरी दर और तकनीक का तालमेल
मजदूरी का भुगतान श्रम नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग, झारखंड द्वारा निर्धारित अद्यतन दरों के अनुरूप ही होगा. साथ ही, सामग्री की खरीद-फरोख्त में भी पूरी तरह से पारदर्शिता बरतने के आदेश हैं. मशीनरी और उपकरणों की खरीदारी के लिए ई-जेम का उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है. विभाग ने सख्त लहजे में कहा है कि जिन अधिकारियों का कार्य संतोषप्रद नहीं पाया जाएगा, उन्हें सुधार की कड़ी चेतावनी दी जाएगी.
अधिकारियों को दिए गए हैं निर्देश
• सोशल ऑडिट अनिवार्य : इस योजना का पिछले तीन वर्षों का सामाजिक अंकेक्षण कराया जाएगा और अब हर साल यह प्रक्रिया अनिवार्य होगी.
• तृतीय पक्ष मूल्यांकन : केवल विभागीय रिपोर्ट ही नहीं, बल्कि किसी प्रतिष्ठित संस्थान से बाह्य मूल्यांकन भी कराया जाएगा.
• समयबद्ध रिपोर्टिंग : प्रत्येक निकासी पदाधिकारी को हर माह की 5 तारीख तक भौतिक और वित्तीय प्रगति रिपोर्ट अनिवार्य रूप से सौंपनी होगी. इसमें किसी भी तरह की देरी या झूठे आंकड़े स्वीकार नहीं किए जाएंगे.


