NewsWave Desk : पारंपरिक बिजली बचाने पर केंद्र सरकार लगातार जोर देती है. ऐसे में सोलर पैनल बाजार में काफी चर्चित हो गया है. वहीं, इससे प्रदूषण का खतरा भी काफी है. सोलर पैनल के जरिये लोग सूरज की रौशनी से घरों की बिजली सप्लाई जारी रख सकते हैं. आज कल घर और ऑफिस यूज के लिये सोलर पैनल का अधिकाधिक उपयोग होने लगा है. ऐसे में सबसे अधिक कंफ्यूजन सोलर पैनल के बैटरी को लेकर रहती है. लोगों को यह डर रहता है सूरज से चार्ज होने के कारण सोलर पैनल अधिक बैकअप नहीं देता है. ऐसे में बता दें कि सोलर पैनल की बैटरी पर इसके रौशनी देने की क्षमता निर्भर करती है. अगर सोलर सिस्टम 5 वॉट का है. और बैटरी की क्षमता दस वॉट है. तो सोलर सिस्टम दस घंटे तक बिजली दे सकती है. हालांकि आपके घर की बिजली की खपत पर भी सोलर पैनल की क्षमता निर्भर करती है.
उपकरणों की क्षमता का असर
हालांकि इसकी संचालन क्षमता उपकरणों और उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली बिजली पर भी निर्भर करती है. जहां, सोलर पैनल पर कई सारे डिवाइस का लोड एक साथ देने से, इसका समय कम हो सकता है. अगर, एक साथ एसी, गीजर, वॉशिंग मशीन और दूसरे भारी डिवाइस सोलर पैनल पर चलाते है तो घर की खपत बढ़कर दो वॉट कम हो जाएगा. ऐसे में बैटरी लगभग 5 घंटे में खत्म हो सकती है.

बैटरी की होती है अहम भूमिका
सोलर पैनल के साथ ही बैटरी की भी अहम भूमिका होती है. दरअसल, सोलर पैनल सिर्फ सूरज की रोशनी से बिजली बनाता है. इस बिजली को बैटरी में स्टोर किया जाता है. ऐसे में खराब मौसम या रात के समय में बिजली की सप्लाई सामान्य रहे.
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