Hazaribagh: विकास के दावों और सरकारी योजनाओं के बीच चुरचू प्रखंड का आदिवासी बहुल बिंदकरवा गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है. आजादी के करीब आठ दशक बाद भी गांव तक पक्की सड़क नहीं पहुंच सकी है. करीब 400 की आबादी वाला यह गांव आज भी एक कच्ची पगडंडी के सहारे मुख्य सड़क से जुड़ा हुआ है.
बरसात में और बढ़ जाती है परेशानी
चनारो पंचायत के घने जंगलों के बीच बसे इस गांव में बारिश के दौरान हालात और गंभीर हो जाते हैं. कच्चे रास्ते के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती. ग्रामीणों को बीमार व्यक्ति को चारपाई या अन्य साधनों से मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है. हर मानसून में आवागमन लगभग ठप हो जाता है.

सड़क के अभाव में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार प्रभावित
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई, मरीजों का इलाज और किसानों की उपज को बाजार तक पहुंचाने में भारी दिक्कत होती है. वर्षों से सड़क निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई. ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2019 में महिला, पुरुष और बच्चों ने तीर-धनुष व ढोल-नगाड़ों के साथ घरों में ताला लगाकर चुरचू प्रखंड मुख्यालय का घेराव किया था. उस समय तत्कालीन बीडीओ ने सड़क निर्माण का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक सड़क नहीं बन सकी.
‘चुनाव में वादे, बाद में गांव की अनदेखी’
ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि गांव पहुंचकर बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद गांव को भूल जाते हैं. कई बार सांसद, विधायक, जिला परिषद, प्रमुख, मुखिया और जिला प्रशासन को आवेदन देने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ. ग्रामीणों के अनुसार, वर्तमान मांडू विधायक तिवारी महतो को भी गांव की बदहाल स्थिति दिखाई गई थी. विधायक ने सड़क निर्माण का भरोसा दिया था, लेकिन काम शुरू नहीं हो सका.
पंचायत मुखिया ब्रज बिहारी महतो ने कहा कि सड़क की मरम्मत और निर्माण के लिए प्रयास किए जाएंगे. वहीं प्रखंड विकास पदाधिकारी ललित राम ने जल्द निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया है. विधायक तिवारी महतो ने भी सड़क निर्माण सहित अन्य समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया है.
ग्रामीणों का सवाल, आखिर कब बनेगी सड़क?
बिंदकरवा की कहानी केवल एक गांव की नहीं, बल्कि उन कई ग्रामीण बस्तियों की तस्वीर है जहां आज भी विकास की बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंच सकी हैं. ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर उनकी पगडंडी कब पक्की सड़क में बदलेगी और विकास की मुख्यधारा से उनका गांव कब जुड़ेगा.


