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गिरिडीह: सड़क बनी दलदल तो ग्रामीणों ने गड्ढों में रोपा धान, अनोखे अंदाज में जताया विरोध

Giridih: खोरीमहुआ-कोडरमा मुख्य मार्ग से गावां-पिहरा को जोड़ने वाली सड़क की बदहाल स्थिति से परेशान उत्तरी डोरंडा पंचायत के ग्रामीणों का सब्र...

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दलदल बनी सड़क पर ग्रामीणों ने रोपा धान

Giridih: खोरीमहुआ-कोडरमा मुख्य मार्ग से गावां-पिहरा को जोड़ने वाली सड़क की बदहाल स्थिति से परेशान उत्तरी डोरंडा पंचायत के ग्रामीणों का सब्र आखिरकार जवाब दे गया. वर्षों से जर्जर पड़ी सड़क की मरम्मत नहीं होने और लगातार अनदेखी से नाराज ग्रामीणों ने शुक्रवार को अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया. सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढों और दलदली हिस्सों में धान की रोपाई कर ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त किया. इस अनूठे प्रदर्शन का उद्देश्य सरकार और संबंधित विभाग का ध्यान सड़क की गंभीर समस्या की ओर आकर्षित करना था.

बरसात शुरू होते ही सड़क हो जाती है दलदल में तब्दील

प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों ने कहा कि यह सड़क अब सड़क कम और खेत ज्यादा दिखाई देती है. बरसात शुरू होते ही जगह-जगह बने गहरे गड्ढों में पानी भर जाता है, जिससे पूरी सड़क दलदल में तब्दील हो जाती है. ऐसे में पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है, जबकि दोपहिया और चारपहिया वाहनों का आवागमन बेहद जोखिमभरा हो जाता है. कई बार वाहन चालक फिसलकर घायल हो चुके हैं और छोटे-बड़े सड़क हादसे भी हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद संबंधित विभाग ने सड़क की मरम्मत या पुनर्निर्माण की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की.

बरसात के दिनों में बढ़ जाती है परेशानी 

ग्रामीणों ने बताया कि यह सड़क क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाती है. उत्तरी डोरंडा पंचायत सहित आसपास के कई गांवों के लोग प्रतिदिन इसी मार्ग से खोरीमहुआ, गावां और अन्य क्षेत्रों तक आते-जाते हैं. सैकड़ों छात्र-छात्राएं स्कूल और कॉलेज पहुंचने के लिए इसी सड़क का उपयोग करते हैं. इसके अलावा मरीजों को अस्पताल ले जाने, किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने, लोगों को बैंक, सरकारी कार्यालय, साप्ताहिक हाट और धार्मिक स्थलों तक जाने के लिए भी इसी मार्ग पर निर्भर रहना पड़ता है. सड़क की बदहाल स्थिति के कारण बरसात के दिनों में लोगों की परेशानी कई गुना बढ़ जाती है और कई बार आवागमन लगभग ठप हो जाता है.

वर्षों बीत जाने के बावजूद सड़क की स्थिति जस की तस

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार संबंधित विभागीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को सड़क की समस्या से अवगत कराया. ज्ञापन भी सौंपे गए और कई बार मरम्मत की मांग उठाई गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला. वर्षों बीत जाने के बावजूद सड़क की स्थिति जस की तस बनी हुई है. इससे लोगों में भारी नाराजगी है. ग्रामीणों का कहना है कि धान की रोपाई कर उन्होंने यह संदेश देने का प्रयास किया है, कि यदि सड़क की हालत ऐसी ही रही तो इसे सड़क नहीं बल्कि खेत ही मान लिया जाए. उनका कहना था कि जब सरकार और प्रशासन को आम लोगों की समस्याएं दिखाई नहीं देतीं, तब इस तरह के प्रतीकात्मक विरोध के माध्यम से अपनी आवाज उठानी पड़ती है.

सड़क के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया जल्द शुरू करने की मांग 

प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की, कि इस सड़क के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए और बरसात के दौरान लोगों को राहत पहुंचाने के लिए तत्काल अस्थायी मरम्मत भी कराई जाए. ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा. उन्होंने स्पष्ट कहा कि भविष्य में सड़क जाम या किसी बड़े जनआंदोलन की स्थिति उत्पन्न होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित जनप्रतिनिधियों की होगी. ग्रामीणों के इस अनोखे विरोध प्रदर्शन की चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है.

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