Ranchi: झारखंड के गलियारों में इन दिनों एक पत्र चर्चा का विषय बना हुआ है. वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने वित्त सचिव प्रशांत कुमार को एक अत्यंत कड़े और स्पष्ट लहजे में पत्र लिखकर यह साफ कर दिया है कि अब राज्य को केंद्र की मेहरबानी के भरोसे नहीं, बल्कि अपने संसाधनों के दम पर खड़ा होना होगा. पत्र में कहा है कि वित्त वर्ष 2026-27 के 1,58,560 करोड़ रुपये के बजट के सामने राजस्व की स्थिति चिंताजनक है. कुल 1,36,210.04 करोड़ रुपये के राजस्व लक्ष्य के खिलाफ स्थिति बहुत अच्छी नहीं है. वित्त मंत्री ने कहा है कि केंद्र की नीतियों (जीएसटी युक्तिकरण और वीग्रामजी योजना) ने राज्य पर 6000 से 8000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ डाल दिया है. सबसे शर्मनाक स्थिति यह है कि 18,273.66 करोड़ रुपये के अनुदान लक्ष्य के विरुद्ध 7 जुलाई 2026 तक मात्र 126 करोड़ रुपये (0.69%) मिले हैं. यह आंकड़ा यह बताने के लिए काफी है कि केंद्र सरकार के सामने झारखंड की स्थिति कैसी है.
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जनता पर टैक्स नहीं, संसाधनों की लूट पर लगाम
खनन और परिवहन का एकीकरण: वित्त मंत्री ने राज्य में चल रहे मालवाहक वाहनों की जांच पर सवाल उठाया है. अगर खनन विभाग और परिवहन विभाग का एकीकरण कर दिया जाए, तो अवैध रूप से चल रहे वाहनों और राजस्व की चोरी पर नकेल कसी जा सकती है. यह केवल एक प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि राजस्व बढ़ाने का मास्टरस्ट्रोक साबित होगा.
फाइन्स आयरन ओर का खजाना
झारखंड में विभिन्न कंपनियों के पास पिछले 25-30 वर्षों से लगभग 20 मिलियन टन ‘फाइन्स आयरन ओर’ डंप पड़ा है. वित्त मंत्री ने सीधे तौर पर इशारा किया है कि यदि राज्य सरकार इसके लिए बिक्री परमिट और जीएसटी चालान जारी कर दे, तो राज्य के खजाने में हजारों करोड़ रुपये का राजस्व तुरंत आ सकता है.

विशेषज्ञों की टीम की जाए गठित
वित्त मंत्री ने केवल निर्देश नहीं दिए हैं, बल्कि समाधान भी सुझाया है. उन्होंने निर्देश दिया है कि उनकी अध्यक्षता में एक टीम गठित की जाए. इस टीम में सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) दक्ष अधिकारी और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल होंगे. इनका काम होगा ‘स्वकर’ और ‘गैर स्वकर’ राजस्व बढ़ाने के लिए वैकल्पिक सुझाव देना.
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सचिवों की जवाबदेही तय, बहानेबाजी अब नहीं चलेगी
पत्र में सबसे कड़ा लहजा उन सचिवों के लिए है जो केंद्रीय अनुदान लाने में नाकाम रहे हैं. मात्र 0.69% की प्राप्ति पर वित्त मंत्री ने संबंधित विभाग के सचिवों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे सकारात्मक प्रयास करें. अनुदान की राशि का न आना प्रशासनिक अक्षमता को दर्शाता है.


