Ranchi : राज्य की राजधानी स्थित न्याय का मंदिर यानी नया हाईकोर्ट परिसर, अब केवल कानूनी फैसलों के लिए ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर ऊर्जा के एक बड़े केंद्र के रूप में भी जाना जाएगा. झारखंड अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी JREDA ने इस प्रतिष्ठित परिसर में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार की एक अत्यंत महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है. यह पहल न केवल बिजली की भारी बचत करेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और हरित भविष्य की आधारशिला भी रखेगी.
कार – पोर्ट सोलर पावर प्लांट का होगा विस्तार
नए उच्च न्यायालय परिसर में सौर ऊर्जा के उपयोग को प्राथमिकता दी जा रही है. पहले से ही सफलतापूर्वक चल रहे 2 मेगावाट के कार-पोर्ट सोलर प्लांट की अपार सफलता को देखते हुए, अब इसमें 1.2 मेगावाट की और वृद्धि की जा रही है.आमतौर पर कार पार्किंग के लिए बनी जगह का उपयोग सिर्फ वाहनों को खड़ा करने के लिए होता है. लेकिन इस योजना में ‘कार-पोर्ट’ तकनीक का उपयोग किया जा रहा है. जहां पार्किंग क्षेत्र की छत पर ही सौर पैनल लगाए जाएंगे. इससे नीचे वाहन सुरक्षित छाया में रहेंगे और ऊपर से स्वच्छ सौर बिजली का उत्पादन होगा.
पर्यावरण और आर्थिक लाभ का तालमेल
यह परियोजना कार्बन उत्सर्जन को कम करने में बड़ी भूमिका निभाएगी. उच्च न्यायालय परिसर जैसे महत्वपूर्ण सरकारी संस्थानों में 24×7 बिजली की आवश्यकता होती है. सोलर प्लांट के माध्यम से, परिसर अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आत्मनिर्भर हो जाएगा. जिससे ग्रिड पर निर्भरता कम होगी और सरकारी खजाने की भी बचत होगी. सौर पैनलों की स्थापना से होने वाला ऊर्जा उत्पादन कोयले पर आधारित बिजली संयंत्रों पर निर्भरता कम करेगा.
गुणवत्ता और तकनीकी मानकों पर विशेष ध्यान
इसमें मोनो-क्रिस्टलीय सौर मॉड्यूल का उपयोग किया जाएगा. जो उच्च दक्षता वाले होते है. इतना ही नहीं, परिसर में अत्याधुनिक ‘वेदर मॉनिटरिंग सिस्टम और स्काडा प्रणाली लगाई जाएगी. इस तकनीक के जरिए वास्तविक समय में बिजली उत्पादन की निगरानी की जा सकेगी, जिससे सिस्टम की कार्यक्षमता हमेशा बनी रहेगी.
पांच साल की व्यापक सुरक्षा
योजना की सबसे बड़ी खूबी इसका ‘कॉम्प्रिहेंसिव मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट’ है. सरकार ने केवल प्लांट लगाने पर ही ध्यान नहीं दिया है, बल्कि अगले पांच वर्षों तक इसके सुचारू संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी तय की है. इसमें सफाई, तकनीकी जांच और किसी भी खराबी को तुरंत ठीक करने के प्रावधान शामिल है. इससे यह सुनिश्चित होगा कि यह सोलर सिस्टम लंबे समय तक बिना किसी बाधा के कार्य करे और परिसर को निर्बाध सौर ऊर्जा देता रहे.
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