Ranchi : झारखंड सरकार ने राज्य को पर्यावरण अनुकूल और ऊर्जा-सक्षम बनाने की दिशा में कवायद शुरू की है. इसका मुख्य उद्देश्य ऊर्जा दक्षता प्रथम सिद्धांत संधारणीय मांग पक्ष प्रबंधन DSM और जलवायु-अनुकूल पहलों को धरातल पर उतारना है. इस अभियान के तहत राज्य के सरकारी भवनों, स्कूलों, कृषि और नगर निकायों में ऊर्जा की बर्बादी रोकने तथा कार्बन उत्सर्जन को न्यूनतम करने के लिए चौतरफा रणनीति तैयार की गई है. इस योजना के माध्यम से राज्य सरकार न केवल ऊर्जा की बचत करेगी, बल्कि जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटने के लिए एक मजबूत ढांचा भी तैयार कर रही है.
अत्याधुनिक तकनीकों और थ्री डी फिल्मों से बढ़ेगी जागरूकता
योजना के अंतर्गत डीकार्बोनाइजेशन, पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा दक्षता जैसे गंभीर विषयों पर एनिमेटेड और थ्री डी लघु फिल्मों का निर्माण किया जाएगा. इसके साथ ही, राज्य भर के सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में डिमांड साइड मैनेजमेंट DSM क्लब की स्थापना की जाएगी, ताकि भावी पीढ़ी बचपन से ही ऊर्जा संरक्षण के महत्व को समझ सके और इसे अपनी जीवनशैली में शामिल कर सके. डिप्लोमा और डिग्री इंजीनियरिंग कॉलेजों के छात्रों के लिए विशेष थ्योरी और प्रैक्टिकल कार्यशालाएं भी आयोजित की जाएंगी.
सरकारी परिसरों में लगेंगे फाइव स्टार उपकरण, बदलेगी व्यवस्था
सरकारी संस्थानों का आधुनिकीकरण किया जाएगा. राज्य के सभी सरकारी स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों और अन्य सरकारी भवनों में पुराने और भारी बिजली खपत वाले उपकरणों को बदला जाएगा. इनकी जगह फाइव-स्टार रेटेड ऊर्जा-सक्षम एयर कंडीशनर, सुरक्षा वायर से लैस बीएलडीसी BLDC सीलिंग फैन, इंडक्शन कुकटॉप और एलईडी LED लाइटिंग फिक्सचर्स लगाए जाएंगे. इन उपकरणों की आपूर्ति, स्थापना और अगले पांच वर्षों तक व्यापक रखरखाव की जिम्मेदारी चयनित एजेंसियों की होगी. जिससे सरकारी खजाने पर बिजली बिल का बोझ भारी मात्रा में कम होगा.
कूल रूफ और हीट आइलैंड मिटिगेशन प्लानिंग
बदलते मौसम और बढ़ती गर्मी को देखते हुए झारखंड सरकार ने इस योजना में एक बेहद आधुनिक दृष्टिकोण अपनाया है. राज्य के प्रमुख शहरों में ‘कूल रूफ’ (ठंडी छतों) की व्यवहार्यता का अध्ययन किया जाएगा और प्रदर्शन परियोजनाओं को लागू किया जाएगा. इसका उद्देश्य अर्बन हीट आइलैंड के प्रभाव को कम करना है, यानी कंक्रीट के जंगलों के कारण शहरों में बढ़ने वाले अत्यधिक तापमान को नियंत्रित कर नागरिकों को राहत पहुंचाना है. इसके साथ ही सरकारी भवनों और पंपिंग स्टेशनों का ‘इन्वेस्टमेंट ग्रेड एनर्जी ऑडिट भी कराया जाएगा.
कृषि, नगर निकाय और बाजारों के लिए विशेष रणनीति
• कृषि क्षेत्र : किसानों को ऊर्जा-सक्षम पंप सेटों और आधुनिक तकनीकों के प्रति जागरूक किया जाएगा ताकि सिंचाई में बिजली और पानी दोनों की बचत हो.
• नगर निकाय : शहरी क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइट और वाटर पंपिंग स्टेशनों का ऊर्जा ऑडिट कर उन्हें स्मार्ट और ऊर्जा-बचत प्रणाली से जोड़ा जाएगा.
• इन्वेस्टमेंट बाजार : राज्य में ऊर्जा दक्षता से जुड़े उद्योगों और निवेशकों को आकर्षित करने के लिए विशेष इन्वेस्टमेंट बाजार का आयोजन होगा. जिससे हरित रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.
• मार्केट सर्विलांस : ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी के स्टैंडर्ड्स एंड लेबलिंग कार्यक्रम को कड़ाई से लागू करने के लिए बाजार की निगरानी की जाएगी और खुदरा विक्रेताओं को प्रशिक्षित किया जाएगा ताकि नकली या कम स्टार वाले उपकरणों की बिक्री पर रोक लग सके.
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