Ranchi: झारखंड के विभिन्न जिलों में सरकारी भवनों की छतों पर लगे ग्रिड कनेक्टेड हाइब्रिड रूफटॉप सोलर पावर प्लांट अब बंद नहीं रहेंगे. झारखंड रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (जरेडा) ने इन्हें पूरी तरह चालू और दुरुस्त रखने की कवायद शुरू कर दी है. अगले पांच वर्षों के लिए कम्प्रीहेंसिव मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट एंड ऑपरेशन के तहत एजेंसियों के चयन के लिए रेट कॉन्ट्रैक्ट टेंडर जारी किया है. इस पहल का मुख्य उद्देश्य राज्य में सौर ऊर्जा प्रणालियों का दीर्घकालिक और निर्बाध संचालन सुनिश्चित करना है.
24 घंटे बिजली और 5 साल की गारंटी
इस अनुबंध के तहत चयनित एजेंसी को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी सोलर प्लांट दिन-रात यानी 24 घंटे चालू रहें, ताकि शाम से सुबह तक सरकारी भवनों में पूरी रोशनी मिल सके. अनुबंध में बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, इन्वर्टर, और पीवी मॉड्यूल जैसे सभी महत्वपूर्ण हिस्सों की पांच साल की सर्विसिंग और रिप्लेसमेंट गारंटी शामिल है. विशेष रूप से नई बैटरियों की न्यूनतम लाइफ 5 वर्ष होनी अनिवार्य की गई है. इसके अलावा पुरानी बैटरियों और पीसीयू को बाय-बैक (पुराना लें, नया दें) नीति के तहत बदला जाएगा.
महीने में दो बार जांच और तकनीकी निगरानी
सोलर प्लांट की कार्यक्षमता बनाए रखने के लिए ठेकेदार को महीने में दो बार प्रिवेंटिव यानी रूटीन मेंटेनेंस करना होगा. इसमें सोलर मॉड्यूल की सफाई, बैटरी में पानी (टॉपिंग अप) डालना, इलेक्ट्रिकल कनेक्शनों को कसना, बिजली लीकेज की जांच, मॉड्यूल का झुकाव (टिल्ट एंगल) बदलना और अर्थिंग की मरम्मत जैसे काम शामिल हैं. इस पूरे रखरखाव का रिकॉर्ड जेरेडा कार्यालय में नियमित रूप से जमा करना होगा.
3 दिन में खराबी दूर नहीं हुई तो 1000 रुपये प्रतिदिन जुर्माना
यदि किसी प्लांट में कोई खराबी आती है, तो ठेकेदार को उसे तुरंत ठीक करना होगा. शिकायत दर्ज होने के तीन दिनों के भीतर यदि खराबी दूर नहीं की गई, तो ठेकेदार पर 1,000 रुपये प्रतिदिन की दर से जुर्माना लगाया जाएगा. साथ ही ठेकेदारों को राज्य में स्पेयर पार्ट्स का पर्याप्त स्टॉक रखना होगा. यदि कोई एजेंसी मेंटेनेंस करने में विफल रहती है, तो दो नोटिस के बाद काम दूसरी तकनीकी योग्य एजेंसी को सौंप दिया जाएगा और पुरानी एजेंसी की बैंक गारंटी जब्त कर ली जाएगी.
60 दिनों में पूरा करना होगा काम, लापरवाही पर ब्लैकलिस्टिंग
कार्य आदेश जारी होने के 60 दिनों के भीतर सप्लाई, इंस्टॉलेशन और री-कमिशनिंग का पूरा काम समाप्त करना होगा. इसमें जेरेडा द्वारा किया जाने वाला प्री-डिस्पैच इंस्पेक्शन भी शामिल है. यदि काम में देरी होती है, तो 0.5 प्रतिशत प्रति सप्ताह की दर से अधिकतम 10 प्रतिशत तक लिक्विडेटेड डैमेज (हर्जाना) वसूला जाएगा. घटिया सामग्री देने या पांच साल के मेंटेनेंस में लापरवाही बरतने पर 15 दिनों का नोटिस देकर ठेकेदार का वर्क ऑर्डर रद्द किया जा सकता है और उसे ब्लैकलिस्ट भी किया जाएगा.
भुगतान की शर्तें
- पहला भाग (90% भुगतान): बैटरी और पीसीयू की सही सलामत सप्लाई एवं इंस्टॉलेशन होने तथा जेरेडा अधिकारियों के सत्यापन के बाद 90 प्रतिशत भुगतान किया जाएगा. इसके लिए कमर्शियल इनवॉइस, ई-वे बिल और सामग्री की तस्वीरें जमा करनी होंगी.
- दूसरा भाग (10% भुगतान): सिस्टम के लगातार 60 दिनों तक संतोषजनक ढंग से काम करने और पहली मासिक सीएमसी रिपोर्ट जमा करने के बाद शेष 10 प्रतिशत राशि जारी की जाएगी.
- CMC भुगतान (20% सालाना): अगले पांच वर्षों तक प्रत्येक वर्ष के अंत में मासिक सीएमसी रिपोर्ट जमा करने के बाद 20-20 प्रतिशत राशि जारी की जाएगी.
