Ranchi : झारखंड में थ्रोबॉल खेल और उसके भविष्य को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है. वर्षों से राज्य में थ्रोबॉल खेल की कमान संभाल रहे थ्रोबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया से जुड़े खिलाड़ियों और पदाधिकारियों ने एक नया संगठन बनाए जाने के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. अपनी मांगों को लेकर खिलाड़ियों ने राजधानी रांची के ऐतिहासिक जयपाल सिंह स्टेडियम में बांह पर काला बिल्ला बांधकर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया. प्रदर्शन कर रहे खिलाड़ियों और खेल पदाधिकारियों का सीधा आरोप है कि राज्य में एक नया खेल संघ बनाकर थ्रोबॉल को बांटने की कोशिश की जा रही है. इससे खेल का विकास रुक जाएगा और खिलाड़ियों के बीच असमंजस और विभाजन की स्थिति पैदा होगी.
खिलाड़ियों ने एकजुट होकर आवाज उठाई कि
18 वर्षों का योगदान : थ्रोबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया पिछले 18 सालों से लगातार जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों को तराशने का काम कर रहा है.
अंतरराष्ट्रीय पहचान : इसी संगठन के बैनर तले खेलकर झारखंड और देश के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व किया है और कई स्वर्ण पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया है.
भविष्य पर संकट : प्रदर्शनकारियों के अनुसार, एक ही खेल के दो अलग-अलग संगठन होने से खिलाड़ियों के अधिकार, उनके चयन के अवसर और उनका भविष्य अधर में लटक जाएगा.
नए प्रयोग के बजाय पुराने को मिले सरकारी सहयोग
महिला थ्रोबॉल टीम की कप्तान अरुण यादव ने खिलाड़ियों का पक्ष रखते हुए कहा कि सरकार और संबंधित खेल संस्थाओं को किसी नए संगठन को मान्यता देने या उसका गठन करने के बजाय सालों से काम कर रहे पुराने संघ को ही और मजबूत बनाना चाहिए. अगर पुराने संगठन को ही बेहतर संसाधन और सहयोग मिले, तो खिलाड़ी और अधिक ऊर्जा के साथ देश का नाम रोशन कर सकेंगे.
स्टेडियम की बदहाली और मूलभूत सुविधाओं का अभाव
धरना-प्रदर्शन के दौरान खिलाड़ियों ने न सिर्फ नए संघ का विरोध किया, बल्कि अभ्यास के दौरान होने वाली व्यावहारिक दिक्कतों को भी उजागर किया. कप्तान अरुण यादव ने बताया कि जिस जयपाल सिंह स्टेडियम में खिलाड़ी सालों से पसीना बहा रहे है. वहां आज भी मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है. विशेष रूप से महिला खिलाड़ियों के लिए चेंजिंग रूम (कपड़े बदलने के कमरे) की स्थिति बेहद खराब है. खिलाड़ियों का कहना है कि लंबे समय से इस समस्या को दूर करने की मांग की जा रही है, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है.
खेल अधिकारियों से पुनर्विचार की मांग
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि उनका यह आंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक है. इसका एकमात्र उद्देश्य थ्रोबॉल खेल की गरिमा और खिलाड़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखना है. उन्होंने झारखंड सरकार और खेल विभाग के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि नए संगठन के गठन के फैसले पर तुरंत पुनर्विचार किया जाए और थ्रोबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया को प्राथमिकता देते हुए खिलाड़ियों के हितों की रक्षा की जाए.
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