हजारीबाग : पक्के मकान वालों को मिला लाभ, जर्जर मिट्टी के घर में जान हथेली पर रखकर सो रहे सात लोग, ब्लॉक का चक्कर काट रहा मजदूर बेटा

Hazaribagh : जिला के कटकमदाग प्रखंड अंतर्गत मसरातू पंचायत के वार्ड नंबर एक से सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और उसमें व्याप्त कथित...

पीड़ित मोहम्मद मिराज

Hazaribagh : जिला के कटकमदाग प्रखंड अंतर्गत मसरातू पंचायत के वार्ड नंबर एक से सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और उसमें व्याप्त कथित बंदरबांट का मामला सामने आया है. विकास के दावों के बीच, गांव के एक अत्यंत गरीब और बेसहारा परिवार का मिट्टी का कच्चा मकान पूरी तरह ध्वस्त होने की कगार पर है. 2007 में पिता के निधन के बाद घर के इकलौते कमाऊ सदस्य और पेशे से पेंटर मोहम्मद मिराज अपनी वृद्ध विधवा मां खैरुन निशा, पत्नी और चार बच्चों के साथ एक ऐसे मलबेनुमा घर में रहने को मजबूर है, जो कभी भी किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है. हैरत की बात यह है कि इस परिवार की वृद्ध मां खैरुन निशा का नाम साल 2015 से ही सरकारी आवास योजना की प्रतीक्षा सूची में दर्ज है, लेकिन 11 साल बीत जाने के बाद भी उन्हें एक अदद पक्की छत नसीब नहीं हो सकी है.

दो कमरे ढहे, बरसात में दूसरे के घरों में शरण लेने की मजबूरी

पीड़ित मोहम्मद मिराज ने नम आंखों और तीखे तेवरों के साथ बताया कि उनका पैतृक मिट्टी का घर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुका है. हाल ही में घर के दो कमरे भरभराकर गिर गए. जिसके बाद उन्होंने जैसे-तैसे मलबे को साफ कर अपने स्तर से डीपीसी तक का काम कराया है ताकि भविष्य में कोई आस जगे. बरसात के दिनों में पूरे घर में छत से पानी भर जाता है. जिसके कारण अनहोनी के डर से पूरे परिवार को रात के समय किसी अन्य ग्रामीण के घर जाकर सोना पड़ता है. पीड़ित का आरोप है कि इस संबंध में उन्होंने मसरातू पंचायत की मुखिया ज्योति कुमारी और उनके सारे कार्यों का संचालन करने वाले उनके पति सह मुखिया प्रतिनिधि शंभू गोप के पास दर्जनों बार लिखित आवेदन देकर गुहार लगाई, लेकिन हर बार उन्हें श्फंड में पैसा नहीं होने का बहाना बनाकर टाल दिया गया.

ब्लॉक और मुखिया के बीच फंसा पेंच

इस मामले में प्रशासनिक संवेदनहीनता और पक्षपात की पराकाष्ठा तब देखने को मिलती है, जब पीड़ित का कहना है कि गांव में कई ऐसे संपन्न और रसूखदार लोग है. जिनके पास पहले से ही कंक्रीट के बड़े और पक्के मकान मौजूद है. उन्हें महज एक-दो महीने पहले ही नया आवास आवंटित कर दिया गया. जब पीड़ित ब्लॉक कार्यालय जाता है, तो अधिकारी कभी डीबीटी न होने का तकनीकी बहाना बनाते है. तो कभी अंचल अधिकारी मुखिया से लिखवाकर लाने की बात कहते है. पिछले 5-6 वर्षों से समाहरणालय, ब्लॉक और मुखिया के घर का चक्कर काट-काट कर थक चुके मोहम्मद मिराज ने अब हताशा में सरकार से सवाल पूछा है कि क्या उन्हें आवास तब मिलेगा जब इस जर्जर घर के मलबे में दबकर उनके परिवार के किसी सदस्य की मौत हो जाएगी. पीड़ित ने जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर न्याय देने की मांग की है.

आरोपों पर बोले मुखिया प्रतिनिधि : फंड की कमी के कारण अटका है मामला

इधर, पीड़ित परिवार द्वारा लगाए गए पक्षपात के आरोपों पर मसरातू पंचायत की मुखिया और मुखिया प्रतिनिधि ने अपनी सफाई दी है. मुखिया प्रतिनिधि ने बताया कि पंचायत स्तर पर किसी भी जरूरतमंद के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जा रहा है. मोहम्मद मिराज के घर की स्थिति खराब है और उनका नाम योजना की सूची में भी है, लेकिन मुख्य समस्या फंड की अनुपलब्धता है. विभाग से फंड नहीं मिलने के कारण ही फिलहाल उन्हें आवास मुहैया नहीं कराया जा सका है. जैसे ही वरीय अधिकारियों की ओर से फंड जारी किया जाएगा. पीड़ित परिवार को प्राथमिकता के आधार पर पक्का मकान आवंटित कर दिया जाएगा.

 

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