Ranchi: झारखंड में उच्च शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) आज प्रदेश मंत्री प्रकाश टूटी के नेतृत्व में राजभवन पहुंचा. प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल सह कुलाधिपति को 8 सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर विश्वविद्यालयों में बढ़ रही शैक्षणिक समस्याओं, जेपीएससी परीक्षा विवाद और छात्रहित से जुड़े कई मुद्दों पर जल्द हस्तक्षेप की मांग की. अभाविप ने ज्ञापन में कहा कि राज्य के कई कॉलेजों में स्नातक की सीटों में कटौती कर दी गई है और कई विषयों की पढ़ाई बंद कर दी गई है. वहीं ग्रामीण क्षेत्रों के कॉलेजों में स्नातकोत्तर (पीजी) की पढ़ाई भी सीमित की जा रही है. संगठन का कहना है कि इससे दूर-दराज और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों, खासकर छात्राओं, के लिए उच्च शिक्षा हासिल करना मुश्किल हो जाएगा.
फीस बढ़ाने का विरोध
संगठन ने बीबीए, बीसीए, बायोटेक्नोलॉजी, कंप्यूटर साइंस जैसे रोजगारपरक पाठ्यक्रमों को बंद करने और बीएड पाठ्यक्रम को सेल्फ फाइनेंस श्रेणी में रखकर फीस बढ़ाने का भी विरोध किया. अभाविप का कहना है कि ऐसे फैसलों से विद्यार्थियों के भविष्य और रोजगार के अवसर प्रभावित होंगे. ज्ञापन में जेपीएससी की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणामों पर भी सवाल उठाए गए. अभाविप ने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने और जांच पूरी होने तक मुख्य परीक्षा स्थगित करने की मांग की.
छात्र हित में आवश्यक कदम उठाने की मांग
अभाविप ने नए झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम में छात्रसंघ से जुड़े प्रावधानों पर भी आपत्ति जताई. संगठन का कहना है कि नए कानून में छात्रसंघ की भूमिका सीमित कर दी गई है और विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाली समितियों में छात्रों की भागीदारी कम कर दी गई है. इसके अलावा रांची विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था, लंबित छात्रवृत्ति, जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं की पढ़ाई और परीक्षा संचालन से जुड़े मुद्दों को भी राज्यपाल के समक्ष रखा गया. प्रदेश मंत्री प्रकाश टूटी ने कहा कि यदि इन छात्रहित से जुड़े मुद्दों का समय रहते समाधान नहीं किया गया तो लाखों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित होगा. उन्होंने राज्यपाल से उच्च शिक्षा व्यवस्था में सुधार, बंद किए गए पाठ्यक्रमों को दोबारा शुरू करने, स्नातक सीटों की कटौती वापस लेने, लंबित छात्रवृत्ति का भुगतान कराने और छात्रों के हित में आवश्यक कदम उठाने की मांग की.
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