Giridih: जिले में जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है. ताजा मामला बिरनी थाना क्षेत्र के कर्री गांव का है, जहां रविवार देर रात हाथियों के हमले में एक मजदूर की दर्दनाक मौत हो गई. घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत और शोक का माहौल है. मृतक की पहचान कर्री गांव निवासी रामचंद्र यादव (55) के रूप में हुई है. वह मजदूरी कर रविवार रात सरिया से साइकिल से अपने घर लौट रहे थे. गांव से करीब 400 मीटर पहले सड़क पर हाथियों का झुंड मौजूद था. अंधेरे में जैसे ही वह वहां पहुंचे, हाथियों ने उन पर हमला कर दिया. हमले में उन्हें पटक-पटक कर मार डाला.
घटना के बाद गांव में मातम
घटना की जानकारी मिलने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे. सूचना पर बिरनी प्रमुख रामु बैठा भी घटनास्थल पहुंचे और पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी. उन्होंने प्रशासन से मृतक के परिजनों को जल्द सरकारी मुआवजा देने, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी उपलब्ध कराने और हाथियों की समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की.
सांसद प्रतिनिधि ने भी की मदद की मांग
सांसद प्रतिनिधि देवनाथ राणा ने भी पीड़ित परिवार से मुलाकात कर शोक व्यक्त किया. उन्होंने वन विभाग और जिला प्रशासन से जल्द राहत राशि उपलब्ध कराने तथा पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता देने की मांग की.
वन विभाग ने दी तत्काल राहत
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची. विभाग ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद मृतक के परिजनों को तत्काल 50 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की. अधिकारियों ने बताया कि शेष 50 हजार रुपये अगले दिन दिए जाएंगे. साथ ही सरकार की ओर से मिलने वाली अन्य सहायता की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है.
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
घटना के बाद कर्री गांव और आसपास के ग्रामीणों में भारी आक्रोश है. ग्रामीणों का कहना है कि इस इलाके में हाथियों की आवाजाही लगातार बनी रहती है, लेकिन वन विभाग समय रहते न तो अलर्ट जारी करता है और न ही पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था करता है. ग्रामीणों ने हाथियों के आवागमन वाले रास्तों पर स्ट्रीट लाइट लगाने, नियमित गश्त बढ़ाने, समय पर अलर्ट जारी करने और हाथी-मानव संघर्ष रोकने के लिए स्थायी कार्ययोजना लागू करने की मांग की है.
लगातार बढ़ रहा हाथी-मानव संघर्ष
ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों के हमले में लगातार लोगों की जान जा रही है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में अब तक ठोस पहल नहीं हुई है. इस घटना के बाद एक बार फिर हाथी-मानव संघर्ष और वन विभाग की तैयारियों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. फिलहाल पुलिस और वन विभाग की टीम मामले की जांच में जुटी है.
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