Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने SARFAESI Act की धारा 14 के तहत बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लंबित आवेदनों के निस्तारण में हो रही देरी पर कड़ी नाराजगी जताई है. न्यायाधीश आनंदा सेन की अदालत ने कहा कि डीसी और सीजेएम की भूमिका केवल सहायता की है. वे संपत्ति के स्वामित्व, हस्तांतरण की वैधता या अन्य विवादों की जांच नहीं कर सकते.
कानून के उद्देश्य पर दिया जोर
अदालत ने स्पष्ट किया कि SARFAESI Act का उद्देश्य बैंकों को शीघ्र ऋण वसूली में सहायता देना है. यदि धारा 14 के तहत आवेदन लंबे समय तक लंबित रखे जाएंगे, तो इससे कानून का उद्देश्य विफल होगा और डिफॉल्टरों को अनुचित लाभ मिलेगा.
कई जिलों में बड़ी संख्या में आवेदन लंबित
सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष बताया गया कि रांची में 146, धनबाद में 308, पूर्वी सिंहभूम में 203, बोकारो में 65 और हजारीबाग में 64 आवेदन लंबित हैं. इसे अदालत ने चिंताजनक बताया.
समयबद्ध निस्तारण का आदेश
हाईकोर्ट ने रांची के उपायुक्त को छह सप्ताह, हजारीबाग और बोकारो के उपायुक्त को चार-चार सप्ताह तथा धनबाद और जमशेदपुर के उपायुक्त को आठ सप्ताह के भीतर लंबित मामलों का निपटारा करने का निर्देश दिया. अन्य जिलों के उपायुक्तों को तीन सप्ताह के भीतर लंबित आवेदन निपटाने का आदेश दिया गया.
CJM को भी दिए निर्देश
अदालत ने यह भी कहा कि सीजेएम के समक्ष धारा 14 के आवेदन क्रिमिनल मिसलेनियस केस के रूप में दर्ज नहीं किए जाने चाहिए. इन्हें प्रशासनिक प्रकृति के “SARFAESI Applications” के रूप में अलग रजिस्टर में दर्ज कर शीघ्र निस्तारित किया जाए, क्योंकि यह न्यायिक नहीं बल्कि प्रशासनिक कार्य है.
