लोहरदगा : भगवान जगन्नाथ का नेत्रदान अनुष्ठान संपन्न, दर्शन मंडप में विराजमान हुए महाप्रभु

Lohardaga : जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भगवान जगन्नाथ का पवित्र नेत्रदान अनुष्ठान बुधवार को श्रद्धा, आस्था और सादगीपूर्ण वातावरण...

Lohardaga : जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भगवान जगन्नाथ का पवित्र नेत्रदान अनुष्ठान बुधवार को श्रद्धा, आस्था और सादगीपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ. इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलराम तथा बहन देवी सुभद्रा के विग्रहों को विधि-विधान के साथ गर्भगृह से बाहर निकालकर दर्शन मंडप में विराजमान कराया गया, जहां भक्तों ने महाप्रभु के प्रथम दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया. जगन्नाथ संस्कृति में नेत्रदान अनुष्ठान का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है. मान्यता है कि स्नान पूर्णिमा के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा अस्वस्थ हो जाते हैं और उपचार के लिए एकांतवास में चले जाते हैं. इस अवधि में भगवान के दर्शन बंद रहते हैं. निर्धारित समय पूरा होने के बाद नेत्रदान संस्कार के माध्यम से भगवान को पुनः दिव्य दृष्टि प्रदान की जाती है और इसके पश्चात भक्तों को उनके दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होता है.

जय जगन्नाथ के जयकारों से गूंजा लोहरदगा

लोहरदगा के विभिन्न जगन्नाथ मंदिरों में सुबह से ही पूजा-अर्चना की तैयारियां शुरू हो गई थीं. वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच सर्वप्रथम गणेश पूजन किया गया. इसके बाद भगवान जगन्नाथ, भगवान बलराम और माता सुभद्रा की विशेष पूजा-अर्चना संपन्न हुई. मंदिर परिसर में उपस्थित श्रद्धालुओं ने भक्ति और उत्साह के साथ पूजा में भाग लिया. पूजा के दौरान तीनों देवी-देवताओं की 108 दीपमालाओं से भव्य आरती उतारी गई. दीपों की जगमगाहट और घंटा-घड़ियाल की ध्वनि के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा. श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से महाप्रभु के अष्टकम का पाठ किया तथा चांवर सेवा के माध्यम से भगवान की आराधना की. मंदिर परिसर में लगातार गूंज रहे (जय जगन्नाथ) के जयकारों ने धार्मिक वातावरण को और भी अलौकिक बना दिया. इस अवसर पर भगवान को गुड़ से बनी बुंदिया, मालपुआ तथा अन्य पारंपरिक व्यंजनों का भोग अर्पित किया गया. मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ को गुड़ से निर्मित प्रसाद अत्यंत प्रिय होता है और इसे अर्पित करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. पूजा के उपरांत उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण भी किया गया.

रथ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं के बीच उत्साह का माहौल 

मंदिर प्रबंधन समिति के सदस्यों, स्थानीय श्रद्धालुओं तथा आसपास के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से पहुंचे लोगों ने पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रम में सहभागिता निभाई. लगभग डेढ़ घंटे तक चले पूजन और अनुष्ठान के पश्चात मंदिर के पट पुनः बंद कर दिए गए. इसके साथ ही भगवान के सप्ताहभर के एकांतवास की अवधि का विधिवत समापन हो गया. जगन्नाथ परंपरा में कटहल का भी विशेष महत्व बताया गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान जगन्नाथ के विग्रहों के निर्माण में उपयोग होने वाली पवित्र लकड़ी के साथ-साथ कटहल को भी शुभता, समृद्धि और प्रकृति से जुड़ाव का प्रतीक माना जाता है. कई स्थानों पर भगवान को कटहल का भोग भी अर्पित किया जाता है तथा इसे महाप्रभु की प्रिय वस्तुओं में शामिल माना जाता है. अब श्रद्धालुओं की निगाहें आगामी रथ यात्रा महोत्सव पर टिकी हैं, जब भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण करेंगे और भक्तों को दर्शन देंगे. लोहरदगा जिले में भी रथ यात्रा को लेकर मंदिर समितियों और श्रद्धालुओं के बीच उत्साह का माहौल देखा जा रहा हैं.

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