NEET विवाद पर जयराम महतो का केंद्र पर निशाना, सोनम वांगचुक के आंदोलन को बताया छात्रों की लड़ाई

Ranchi: डुमरी MLA जयराम कुमार महतो ने शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए...

Jairam Mahto
Jairam Mahto targets the Centre over the NEET controversy

Ranchi: डुमरी MLA जयराम कुमार महतो ने शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए लद्दाख के शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन का खुला समर्थन किया है. उन्होंने वांगचुक को पत्र लिखकर कहा कि यह आंदोलन केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि देश के लाखों छात्रों के भविष्य और भरोसे की लड़ाई है.

सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर सरकार गंभीर नहीं: जयराम महतो

जयराम महतो ने कहा कि सोनम वांगचुक पिछले 17 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे हैं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. उन्होंने चिंता जताई कि लंबे समय से अनशन पर बैठे वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर सरकार अब तक गंभीर नहीं दिखी और बातचीत की कोई पहल नहीं हुई.

पत्र में जयराम महतो ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक, अनियमितताओं और सॉल्वर गैंग की घटनाओं ने छात्रों का विश्वास कमजोर किया है. उनका कहना था कि परीक्षा प्रणाली में आई खामियों का सबसे बड़ा नुकसान उन लाखों युवाओं को हुआ, जिन्होंने वर्षों की मेहनत और सपनों के साथ परीक्षा दी थी.

पेपर लीक मामले पर बोले जयराम महतो 

उन्होंने झारखंड के हजारीबाग स्थित ओएसिस स्कूल से जुड़े पेपर लीक मामले का भी उल्लेख करते हुए कहा कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और CBI जांच में कई आरोपियों की पहचान हुई. उनके अनुसार, इस तरह की घटनाएं परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं. जयराम महतो ने कहा कि परीक्षा रद्द होने, दोबारा परीक्षा कराने और लगातार बदलते फैसलों का सबसे अधिक मानसिक दबाव छात्रों पर पड़ा. उन्होंने दावा किया कि कई छात्र इस तनाव को सहन नहीं कर सके और आत्मघाती कदम तक उठाने को मजबूर हुए. उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें मेहनती छात्रों का भविष्य किसी लापरवाही या भ्रष्टाचार की भेंट न चढ़े.

उन्होंने यह भी कहा कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई और कोचिंग पर बड़ी पूंजी खर्च करते हैं। ऐसे में परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी केवल छात्रों के सपनों को ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार की आर्थिक और मानसिक स्थिति को भी प्रभावित करती है.

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