SHERYA GUPTA
Ranchi: रांची के ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर परिसर में, जहां गुरुवार से आस्था का वह महापर्व शुरू हो चुका है, जिसका साल भर इंतजार रहता है. जी हां, भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा और उससे जुड़े जगन्नाथपुर मेले का आज भव्य आगाज हो गया है. हजारों की संख्या में उमड़े श्रद्धालु, ढोल-नगाड़ों की थाप और चारों तरफ बिखरा उत्साह. बता रहा है कि यह केवल एक मेला नहीं, बल्कि झारखंड की संस्कृति और श्रद्धा का सबसे बड़ा उत्सव है.
सहस्त्र नाम पूजा और रथारोहण की तैयारी
मेले के केंद्र में है भगवान जगन्नाथ का दरबार. इस वक्त मंदिर परिसर में भक्ति का अद्भुत माहौल है. भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमाओं को रथ पर विराजमान करने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. भक्त सहस्त्र नाम पूजा के लिए कतारों में बैठकर उस पल का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जब प्रभु अपने गर्भगृह से निकलकर रथ पर सवार होंगे. प्रशासन ने भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं ताकि लाखों की भीड़ के बीच भी व्यवस्था बनी रहे. इस बार डालसा की ओर से भी विशेष शिविर लगाया गया है, जो श्रद्धालुओं की सहायता के लिए तत्पर है.
झूलों और करतबों का जादू
मेले में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर किसी के लिए कुछ न कुछ खास है. एक तरफ आसमान छूते विशाल झूले बच्चों और युवाओं के रोमांच को बढ़ा रहे हैं, तो दूसरी तरफ अपने करतब दिखाने वाले कलाकार लोगों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर रहे हैं. मौत का कुआं हो या जादू के खेल, कलाकारों ने अपनी कलाकारी से मेले में चार चांद लगा दिए हैं.
रसोई से लेकर पारंपरिक बाजार तक का संगम
यह मेला सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि गृहणियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है. रसोई के छोटे-बड़े हर जरूरत के सामान यहां एक ही छत के नीचे उपलब्ध हैं. इसके साथ ही, झारखंड की पारंपरिक धरोहर भी इस मेले की शोभा बढ़ा रही है. कुदाल, टांगी, फरसा जैसे पारंपरिक औजारों से लेकर बेलना-चकला तक बिक्री के लिए उपलब्ध हैं. यहां के स्थानीय कारीगरों की मेहनत साफ झलक रही है.वहीँ, झारखंड के पारंपरिक वाद्य यंत्रों ढोल और नगाड़े की गूंज इस मेले की आत्मा है, जो हर आगंतुक को अपनी संस्कृति से जोड़ रही है.
बालूसाही और लजीज व्यंजनों की महक
किसी भी मेले का मजा बिना लजीज व्यंजनों के अधूरा है. जगन्नाथपुर मेले में मिठाइयों के स्टॉल सज चुके हैं। यहां की प्रसिद्ध बालूसाही की मिठास लोगों को अपनी ओर खींच रही है. गरम जलेबियों से लेकर स्थानीय व्यंजनों तक, खाने-पीने के स्टॉलों पर लोगों की भीड़ बता रही है कि मेले का स्वाद हर किसी के सिर चढ़कर बोल रहा है.
आर्थिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र
झारखंड के सबसे बड़े मेलों में शुमार जगन्नाथपुर रथ मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं है. यह राज्य की सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों का एक प्रमुख स्तंभ है. मेले के दौरान स्थानीय व्यापारियों और छोटे दुकानदारों के लिए यह रोजगार का सबसे बड़ा अवसर होता है.यहां आने वाले हजारों पर्यटक और श्रद्धालु न केवल भगवान का आशीर्वाद लेते हैं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति देते हैं। स्थानीय कलाकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने के लिए एक बड़ा मंच मिलता है, जो उनकी प्रतिभा को वैश्विक पहचान दिलाने में सहायक है.अगले कई दिनों तक यह मेला रांची की फिजाओं में अपनी गूंज बनाए रखेगा. सुरक्षा के कड़े इंतजाम हैं, बस आप अपने सामानों का ध्यान रखें और इस उत्सव का भरपूर आनंद लें.
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