Koderma: जिले के मरकच्चो प्रखंड के हरलाडीह, जामु और नादकरी गांव में बीती रात जंगली हाथियों के झुंड ने भारी उत्पात मचाया. हाथियों ने खेतों में घुसकर रोपनी के लिए तैयार किए गए धान के बिचड़ों को पैरों तले रौंद दिया, जिससे किसानों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है.
बराकर नदी के रास्ते गांवों में पहुंचे हाथी
जानकारी के अनुसार हाथियों का झुंड बराकर नदी पार कर जामु श्मशान घाट की ओर से सबसे पहले हरलाडीह गांव में दाखिल हुआ. इसके बाद झुंड जामु और नादकरी गांव की ओर बढ़ गया, हाथियों के गांव में पहुंचते ही ग्रामीणों में अफरातफरी मच गई.
दर्जनों किसानों की फसल हुई बर्बाद
हाथियों के हमले में हरलाडीह के राधेश्याम साव (3 एकड़), कैलाश साव (2 एकड़), वासुदेव साव (32 कट्ठा), भागीरथ साव (23 कट्ठा), भीम यादव (20 कट्ठा), धनुकी यादव (2 एकड़), सेवा साव (30 कट्ठा), बालेश्वर साव (2 एकड़), महादेव साव (2 एकड़), मोहिनी देवी (3 एकड़), रजाक धोबी (2 एकड़), विनोद साव (2 एकड़) समेत दर्जनों किसानों के धान के बिचड़े नष्ट हो गए. वहीं जामु के विजय ठाकुर (2 एकड़) और नादकरी के अफजल अंसारी के खेतों में भी भारी नुकसान हुआ है.
बारिश की मार के बाद हाथियों ने बढ़ाई परेशानी
प्रभावित किसानों का कहना है कि इस वर्ष अनिश्चित बारिश के कारण खेती पहले ही प्रभावित थी. बड़ी मेहनत से तैयार किए गए धान के बिचड़े हाथियों द्वारा नष्ट कर दिए जाने से उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया है और आर्थिक संकट गहरा गया है.
वन विभाग की टीम ने संभाला मोर्चा
घटना की सूचना मिलने पर वनकर्मी अनिल साहू, अनिल यादव, कैटल गार्ड जितेंद्र यादव, गुड्डन अंसारी, प्रिंस मोदी और मुरली यादव ग्रामीणों के साथ मौके पर पहुंचे. सभी ने मिलकर हाथियों के झुंड को सुरक्षित तरीके से जंगल की ओर खदेड़ने का प्रयास किया.
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किसानों ने मुआवजा और स्थायी निगरानी की मांग की
प्रभावित किसानों ने वन विभाग से फसल नुकसान का उचित मुआवजा देने की मांग की है. साथ ही हाथियों की लगातार आवाजाही को देखते हुए प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी निगरानी व्यवस्था और प्रभावी सुरक्षा उपाय करने की मांग की है, ताकि भविष्य में फसलों के साथ-साथ जनहानि जैसी घटनाओं से भी बचाव हो सके.
