Bokaro: सीसीएल बोकारो-करगली एरिया अंतर्गत बोकारो थर्मल थाना क्षेत्र की कारो स्पेशल फेज-2 परियोजना के तहत बड़वाबेड़ा गांव के पुनर्वास के लिए चिह्नित जमीन पर गुरुवार को उस समय भारी हंगामा हो गया, जब सीसीएल प्रबंधन विकास कार्य शुरू कराने पहुंचा. विस्थापितों और रैयतों के विरोध के चलते स्थिति तनावपूर्ण हो गई और सीसीएल की टीम को काम शुरू किए बिना ही वापस लौटना पड़ा.
विकास कार्य शुरू कराने पहुंची थी CCL की टीम
सीसीएल खासमहल परियोजना के परियोजना पदाधिकारी सुमेधानंदन के नेतृत्व में अधिकारी, सीसीएल कर्मी, सीआईएसएफ, सुरक्षा कर्मी और होमगार्ड के जवान जेसीबी मशीनों के साथ पुनर्वास स्थल पहुंचे थे. कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बोकारो थर्मल थाना पुलिस भी मौके पर तैनात रही.
विरोध में जुटे सैकड़ों ग्रामीण, JCB का रास्ता रोका
कार्रवाई की सूचना मिलते ही गोविंदपुर, राजा बाजार, नई बस्ती, बाजारटांड़ और नूरी नगर के विस्थापित एवं रैयत विस्थापित संघर्ष समिति के बैनर तले मौके पर पहुंच गए. जिला परिषद सदस्य शहजादी बानो, सांसद प्रतिनिधि जितेंद्र यादव, समिति के सचिव डॉ. दशरथ महतो, मंजूर आलम और जलेश्वर महतो के नेतृत्व में ग्रामीणों ने निर्माण कार्य का विरोध किया. प्रदर्शनकारियों ने जेसीबी मशीनों को आगे बढ़ने से रोक दिया. इस दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई और स्थिति हाथापाई तक पहुंचने की नौबत आ गई.
विरोध के बाद वापस लौटी CCL की टीम
बढ़ते विरोध और तनाव को देखते हुए सीसीएल प्रबंधन ने निर्माण कार्य स्थगित कर दिया. टीम अपनी मशीनें, निर्माण सामग्री और सुरक्षा बलों के साथ मौके से लौट गई.
विस्थापितों की मांग- पहले नौकरी और मुआवजा
विस्थापितों और रैयतों का कहना है कि अधिग्रहित जमीन के बदले उन्हें न तो नियमानुसार रोजगार मिला और न ही उचित मुआवजा. उनका कहना है कि यदि प्रबंधन रोजगार देने में असमर्थ है, तो अधिग्रहित जमीन उन्हें वापस की जाए. ग्रामीणों का आरोप है कि कई दौर की वार्ता के बावजूद अब तक कोई समाधान नहीं निकला है.
CCL का दावा- सभी दायित्व पहले ही पूरे किए जा चुके
. सीसीएल खासमहल परियोजना के पीओ सुमेधानंदन ने कहा कि संबंधित जमीन करीब 40-45 वर्षों से कंपनी के अधिग्रहण में है. उनके अनुसार, 1980 के समझौते के तहत नियोजन और मुआवजे की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है तथा कई लोगों को नियम से अधिक रोजगार भी दिया गया था. उन्होंने कहा कि वर्तमान में 21 अतिरिक्त नौकरियों की मांग के समर्थन में कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया है.
17 करोड़ की परियोजना प्रभावित होने का दावा
सीसीएल प्रबंधन का कहना है कि पुनर्वास स्थल को विकसित करने और चहारदीवारी निर्माण पर करीब 17 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं. विरोध के कारण परियोजना प्रभावित हो रही है. प्रबंधन ने सरकारी कार्य में बाधा डालने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है.
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