गिरिडीह: 105 डिसमिल जमीन विवाद में नया मोड़, CO और भू-माफियाओं की मिलीभगत का आरोप

Giridih: जिले के बिरनी प्रखंड अंतर्गत पलौंजिया गांव की एक पैतृक जमीन को लेकर विवाद एक बार फिर चर्चा में है. गांव...

Giridih:
पैतृक जमीन विवाद में बिरनी सीओ पर गंभीर आरोप

Giridih: जिले के बिरनी प्रखंड अंतर्गत पलौंजिया गांव की एक पैतृक जमीन को लेकर विवाद एक बार फिर चर्चा में है. गांव के निवासी विनय शरण, हर्ष सुमन और राहुल कुमार ने बिरनी के अंचलाधिकारी (सीओ) संदीप महदेशिया पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है. शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उनकी पुश्तैनी जमीन को कथित भू-माफियाओं के साथ मिलीभगत कर दूसरे पक्ष के नाम कराने की कोशिश की जा रही है और अंचल प्रशासन की भूमिका इस पूरे प्रकरण में संदिग्ध रही है.

विवाद 105 डिसमिल पैतृक जमीन से जुड़ा है

शिकायतकर्ता विनय शरण ने बताया कि विवाद उनकी 105 डिसमिल पैतृक जमीन से जुड़ा है. उनके अनुसार, इस जमीन के 52-52 डिसमिल के दो हिस्सों की रजिस्ट्री ऐसे समय में कर दी गई, जब भूमि पहले से विवादित थी. उनका आरोप है कि नियमों के अनुसार विवादित भूमि की रजिस्ट्री नहीं होनी चाहिए थी, लेकिन इसके बावजूद प्रक्रिया पूरी कर ली गई. अब उसी कथित गलत रजिस्ट्री के आधार पर जमीन का म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) कराने का प्रयास किया जा रहा है, जिसका उन्होंने विरोध किया है.

न्यायालय का भी  खटखटाया है दरवाजा

विनय शरण का कहना है कि इस मामले को लेकर उन्होंने न्यायालय का भी दरवाजा खटखटाया है. उनके अनुसार, गिरिडीह सीजेएम कोर्ट ने भी इस पूरे मामले में संबंधित पक्षों से स्पष्टीकरण मांगा है. उनका दावा है कि मामला न्यायिक प्रक्रिया में होने के बावजूद विवादित जमीन से जुड़े प्रशासनिक निर्णय लगातार लिए जा रहे हैं, जिससे उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद कमजोर पड़ती दिख रही है.

जमीन की रसीद  कथित रूप से गलत तरीके से काट दी गई थी

उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 1966 से लेकर 2025 तक उनकी जमीन की रसीद भी कथित रूप से गलत तरीके से काट दी गई थी. हालांकि बाद में तत्कालीन अंचलाधिकारी और अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) ने उस आदेश को निरस्त कर दिया था. शिकायतकर्ता का कहना है कि इससे मामला समाप्त हो गया था, लेकिन वर्ष 2025 में वर्तमान अंचलाधिकारी द्वारा पारित एक आदेश के बाद फिर से विवाद खड़ा हो गया और पहले से सुलझा मामला दोबारा उलझ गया.

अंचलाधिकारी के तबादले को लेकर भी सवाल उठाए

शिकायतकर्ताओं ने अंचलाधिकारी संदीप महदेशिया के तबादले को लेकर भी सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि सीओ का तीन बार तबादला होने के बावजूद वे हर बार कुछ समय बाद पुनः बिरनी अंचल में वापस आ गए. विनय शरण ने कहा कि आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थितियां हैं, जिनके कारण तबादले के बाद भी उनकी वापसी होती रही. उन्होंने इस पूरे पहलू की भी स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है.

परिवार की आजीविका पर संकट खड़ा हो सकता है

परिवार का कहना है कि जिस जमीन पर वर्तमान में खेती की जा रही है और पांच परिवारों के दर्जनों सदस्य अपनी आजीविका चला रहे हैं, उसी भूमि को कागजी प्रक्रिया के माध्यम से दूसरे लोगों के पक्ष में करने की कोशिश की जा रही है. शिकायतकर्ताओं ने इसे एक सुनियोजित साजिश करार देते हुए कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो उनके परिवार की आजीविका पर संकट खड़ा हो सकता है.

प्रधानमंत्री कार्यालय तक आवेदन भेज चुके हैं

विनय शरण ने बताया कि न्याय की उम्मीद में वे गिरिडीह उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक, डीआईजी से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक आवेदन भेज चुके हैं. उनका आरोप है कि लगातार शिकायतों के बावजूद अब तक उन्हें कोई ठोस राहत नहीं मिली है. उन्होंने कहा कि कार्रवाई में हो रही देरी से पूरे मामले को लेकर संदेह और गहरा गया है.शिकायतकर्ताओं ने बिरनी सीओ पर कथित भू-माफियाओं से मिलीभगत का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने की मांग की है. उनका कहना है कि यदि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो जमीन से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं और जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट हो जाएगी.

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