Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने निजी विश्वविद्यालय अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि न्यायालय का अंतरिम आदेश राज्य सरकार को कानून में संशोधन करने से नहीं रोकता. अदालत ने स्पष्ट किया कि अंतरिम आदेश का उद्देश्य केवल यथास्थिति बनाए रखना है, न कि विधायिका की कानून बनाने या संशोधन करने की संवैधानिक शक्ति पर रोक लगाना. सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यदि राज्य सरकार निजी विश्वविद्यालय अधिनियम में संशोधन करना चाहती है. तो वह संविधान और कानून के अनुरूप ऐसा करने के लिए स्वतंत्र है. किसी मामले में पारित अंतरिम आदेश को यह नहीं माना जा सकता कि सरकार भविष्य में विधायी संशोधन नहीं कर सकती.
अदालत ने संबंधित पक्षों को दिए आवश्यक निर्देश
हालांकि, हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिनियम में किए जाने वाले किसी भी संशोधन की वैधता को भविष्य में उचित कानूनी चुनौती मिलने पर न्यायिक समीक्षा के दायरे में परखा जा सकता है. फिलहाल, अदालत ने केवल यह स्पष्ट किया है कि अंतरिम आदेश स्वयं विधायी प्रक्रिया में बाधा नहीं है. यह टिप्पणी उन याचिकाओं की सुनवाई के दौरान आई, जिनमें निजी विश्वविद्यालयों से जुड़े प्रावधानों और राज्य सरकार की कार्रवाई को चुनौती दी गई है. अदालत ने मामले की सुनवाई जारी रखते हुए संबंधित पक्षों को आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया.
ALSO READ: चाईबासा: अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई, 46 लीटर चुलाई शराब जब्त, चार गिरफ्तार
