Newswave Desk: 3 मई को आयोजित NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित पेपर लीक के आरोपों से शुरू हुआ विवाद धीरे-धीरे देशव्यापी छात्र आंदोलन में बदल गया. परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठे, जांच की मांग तेज हुई और बाद में मामला CBI तक पहुंचा. इसी दौरान सोशल मीडिया पर शुरू हुई CJP की मुहिम ने हजारों छात्रों को एक मंच पर ला दिया. जंतर-मंतर से शुरू हुआ आंदोलन कई राज्यों तक पहुंचा, जिसमें छात्रों, सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों का भी समर्थन मिला. लगातार बढ़ते दबाव के बीच 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया और 26 जुलाई को नए शिक्षा मंत्री ने मंत्रालय का कार्यभार संभाल लिया.
3 मई से आंदोलन की शुरुआत
3 मई को NEET-UG परीक्षा आयोजित हुई. परीक्षा के तुरंत बाद प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप लगे और परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे. इसके बाद दोबारा परीक्षा कराने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई. इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में शिक्षा व्यवस्था को लेकर हुई टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर CJP अभियान शुरू हुआ, जिसने देखते ही देखते छात्र आंदोलन का रूप ले लिया.
जंतर-मंतर बना आंदोलन का केंद्र
6 जून को CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके दिल्ली पहुंचे और जंतर-मंतर पर धरना शुरू करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई. 11 से 20 जून के बीच पुणे, लखनऊ, अमृतसर, हैदराबाद, बेंगलुरु, जयपुर और नागपुर समेत कई शहरों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन हुए. 20 जून के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और तेज हो गया तथा आंदोलन में छात्रों के साथ विभिन्न सामाजिक संगठनों की भागीदारी भी बढ़ने लगी.
सोनम वांगचुक के जुड़ने से बढ़ा दबाव
28 जून को पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक आंदोलन से जुड़े और भूख हड़ताल शुरू की. 13 जुलाई को उन्होंने संसद मार्च का ऐलान किया. 15 जुलाई को दिल्ली हाई कोर्ट ने उनके स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखने का निर्देश दिया. 18 जुलाई को उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया. 20 जुलाई को वांगचुक के अनुरोध पर अभिजीत दीपके ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी, जबकि वांगचुक ने अपना अनशन जारी रखा.
विपक्ष का समर्थन और सरकार से बातचीत
21 जुलाई को राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने आंदोलन का समर्थन किया. अखिलेश यादव, शरद पवार और अरविंद केजरीवाल समेत कई नेताओं ने जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की. इसके बाद सरकार की ओर से बातचीत की पहल हुई और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा को वार्ता की जिम्मेदारी सौंपी गई. 24 जुलाई को सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त करते हुए सरकार को शिक्षा सुधार से जुड़े कई प्रस्ताव सौंपे.
25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
करीब तीन महीने तक चले आंदोलन और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर उनका इस्तीफा स्वीकार करते हुए केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी.
26 जुलाई: प्रह्लाद जोशी ने संभाला कार्यभार
रविवार, 26 जुलाई को केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने आधिकारिक रूप से शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभाल लिया. कार्यभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पहली समीक्षा बैठक की और शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी, जवाबदेह और छात्रों के हितों के अनुरूप आगे बढ़ाने की बात कही. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि उन्हें सौंपी गई इस जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा और विनम्रता के साथ निभाने का प्रयास करेंगे.
