Ranchi: झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) द्वारा आयोजित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं और धांधली के मामले में अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) का शिकंजा कसता जा रहा है. मामले की तह तक पहुंचने के लिए जांच एजेंसी ने अपनी कार्रवाई तेज़ कर दी है. रिमांड के तीसरे दिन, सोमवार को सीआईडी की विशेष टीम ने गिरफ्तार किए गए सभी पांचों आरोपियों से पूछताछ की. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जांच टीम ने पांचों आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर सवाल-जवाब किए. सीआईडी का मुख्य उद्देश्य आरोपियों द्वारा दिए गए बयानों का एक-दूसरे से मिलान करना है, ताकि परीक्षा में हुई गड़बड़ी की पूरी कड़ी और इस सिंडिकेट के काम करने के तरीके को आपस में जोड़ा जा सके. वहीं दूसरी तरफ इस मामले में जीपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते के सीआईडी मंगलवार को पूछताछ करेगी.
परीक्षा एजेंसी टीडीपीएल और सुरक्षा मानकों पर सीआईडी का सीधा फोकस
– सीआईडी का प्राथमिक ध्यान परीक्षा का संचालन करने वाली आउटसोर्सिंग एजेंसी मेसर्स टीएसआर डाटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) की कार्यशैली पर केंद्रित है. जांच एजेंसी मुख्य रूप से कई बिंदुओं की पड़ताल कर रही है. जिनमें परीक्षा संचालन के लिए टीडीपीएल को सौंपे गए कार्यों में निर्धारित मानक संचालन प्रक्रियाका कड़ाई से पालन हुआ था या नहीं.
– ओएमआर शीट की प्रोसेसिंग और परिणाम तैयार करने के दौरान गोपनीयता बनाए रखने में कहां-कहां सुरक्षा चूक हुई, इसकी गहन तकनीकी समीक्षा की जा रही है.
गंभीर धाराओं में कसा शिकंजा, संगठित अपराध का संदेह
सीआईडी ने गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की कई संगीन धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है. जांच एजेंसी के रुख से साफ है कि वह इसे किसी साधारण अनियमितता के रूप में नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और संगठित आपराधिक नेटवर्क द्वारा अंजाम दिए गए कृत्य के तौर पर देख रही है.
शीर्ष अधिकारियों की भूमिका भी सीआईडी के रडार पर
इस मामले में सिर्फ निचले स्तर के कर्मचारियों या बिचौलियों तक जांच सीमित नहीं है. सीआईडी इस पहलू की भी बारीकी से पड़ताल कर रही है कि परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों में किस-किस स्तर के अधिकारियों की क्या भूमिका थी. सीआईडी यह सुनिश्चित करने में लगी है कि क्या इस पूरे मामले में जेपीएससी प्रबंधन या शासन स्तर के शीर्ष अधिकारियों की कोई डायरेक्ट या इनडायरेक्ट संलिप्तता थी.
जल्द हो सकते हैं कई बड़े खुलासे
फिलहाल आरोपियों के बयानों को दर्ज किया जा रहा है और उनके द्वारा दी गई जानकारियों को तकनीकी साक्ष्यों से सत्यापित किया जा रहा है. माना जा रहा है कि रिमांड की अवधि समाप्त होने से पहले सीआईडी इस पूरे तंत्र और इसमें शामिल अन्य प्रभावशाली चेहरों से जुड़े कई और अहम खुलासे कर सकती है.
