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एजी की रिर्पोटः झारखंड में धान खरीद में अनियमितता, किसानों को 775 दिन बाद किया गया भुगतान

रांचीः झारखंड में धान खरीद एक बड़ा घोटाला बन गया है. एजी की रिपोर्ट के अनुसार, 1,59,354 किसानों से धान की खरीद...

रांचीः झारखंड में धान खरीद एक बड़ा घोटाला बन गया है. एजी की रिपोर्ट के अनुसार, 1,59,354 किसानों से धान की खरीद की गई. वहीं, एमएसपी का भुगतान दो किस्तों में किया जाना था, लेकिन पहली किस्त का भुगतान 79 से 98 प्रतिशत किसानों को निर्धारित तिथि से 775 दिनों तक की विलंब से किया गया. दूसरी किस्त का भुगतान 64 से 100 प्रतिशत किसानों को 370 दिनों तक की विलंब से किया गया.

क्या बरती गई है अनियमितता?

• 1,741 किसानों को 8.64 करोड़ का एमएसपी भुगतान (अप्रैल 2023) नहीं किया गया.
• 256 पैक्स-लैम्प्स पर कुल 25.10 करोड़ बकाया थे, लेकिन 9.70 करोड़ बकाया राशि वाली 105 पैक्स-लैम्प्स और 7.51 करोड़ बकाया राशि वाली 14 मिलरों को केएमएस 2018- 19 से 2021-22 के दौरान मिलिंग के लिए धान खरीदने की अनुमति दी गई थी.
• 20.77 करोड़ मूल्य का 10,210 मीट्रिक टन धान मिलरों को नहीं दिया गया.
• 33 मिलरों ने केएमएस 2018-19 से 2021- 22 के दौरान मिलिंग के लिए उनके ‌द्वारा उठाए गए धान के बदले एफसीआई को बराबर मात्रा का सीएमआर जमा नहीं किया था.
• एफसीआई से दावा योग्य 692.73 करोड़ के आकस्मिक शुल्कों के विरुद्ध, कंपनी ने केएमएस 2011-12 से 2021-22 के दौरान केवल 93.51 करोड़ के दावे प्रस्तुत किए.
• कंपनी अप्रैल 2016 से मार्च 2022 के दौरान भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) से 88,716 मीट्रिक टन चावल और 29,429 मीट्रिक टन गेहूं नहीं उठा सकी.
• 83 गोदामों के संयुक्त भौतिक सत्यापन के दौरान, बिजली की कमी, धर्मकांटों की अनुपस्थिति, अग्निशमन उपकरण, सीसीटीवी और सुरक्षा कर्मियों की अनुपस्थिति जैसे मुद्दे पाए गए.

यह भी पढ़ें: झारखंड में सरकारी कंपनियों का घोटाला: AG रिपोर्ट में खुलासा

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