एक करोड़ का इनामी नक्सली मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी जीत, पुलिस अधिकारियों ने प्रेस वार्ता कर दी जानकारी

Ranchi: झारखंड पुलिस और सुरक्षा बलों ने नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है. कल एक करोड़ का इनामी नक्सली मिसिर...

Naxal leader
The arrest of Naxal leader Misir Besra, who carried a reward of ₹1 crore, marks a major victory against Naxalism

Ranchi: झारखंड पुलिस और सुरक्षा बलों ने नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है. कल एक करोड़ का इनामी नक्सली मिसिर बेसरा और उसके अन्य चार सहयोगियों को गिरफ्तार किया है. मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी से झारखंड में माओवाद को बड़ा झटका लगा है. राज्य में कल ही 16 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की है. प्रतिबंधित कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) का शीर्ष कैडर, पोलित ब्यूरो और केंद्रीय समिति सदस्य मिसिर बेसरा उर्फ सागर दा को सुरक्षाबलों ने लंबे समय के बाद धनबाद से मंगलवार की रात गिरफ्तार कर लिया. वह पिछले तीन दशक से सुरक्षा बलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ था. एक करोड़ रुपये के इनामी और 141 आपराधिक मामलों के आरोपी मिसिर बेसरा की तलाश में सुरक्षा बल कोल्हान और सारंडा के दुर्गम जंगलों में लगातार सघन अभियान चला रहे थे.

हाल ही में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के उस ऐलान के बाद, जिसमें उन्होंने मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करने का संकल्प दोहराया था, सुरक्षा बलों ने मिसिर बेसरा और असीम मंडल जैसे अंतिम बड़े माओवादी शीर्ष नेताओं को घेरने के लिए अभियान तेज कर दिए थे. मिसिर बेसरा तो पकड़ा गया, लेकिन असीम मंडल अभी भी सुरक्षाबलों की पकड़ से दूर है. इस गिरफ्तारी में सीआरपीएफ आईजी साकेत सिंह, आईजी अभियान नरेंद्र सिंह और झारखंड जगुआर के आईजी अनूप बिरथरे की भूमिका अहम रही है.

छात्र राजनीति से उग्रवाद और ‘लखीसराय कोर्ट जेलब्रेक’ का खौफनाक इतिहास

  • मिसिर बेसरा का वामपंथी उग्रवाद से जुड़ाव छात्र जीवन के दौरान धनबाद के राजगंज में पढ़ाई के दौरान हुआ. यह दौर झारखंड आंदोलन और सामाजिक-राजनीतिक उथल-पुथल का था.
  • 1980 के दशक में मिसिर बेसरा ने घर छोड़ दिया और माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर (एमसीसी) में शामिल हो गया.
  • वर्ष 1985-86 में सिंदरी में आयोजित सम्मेलन में वॉलंटियर के रूप में काम किया. वर्ष 1986 में सोवन मरांडी ने उसे संगठन की प्राथमिक सदस्यता दिलाई.
  • वर्ष 1990-2000 के दौरान एमसीसी नेता प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के संपर्क में आकर उसने कोलकाता, रांची और दक्षिणी छोटानागपुर क्षेत्र में संगठन का तेजी से विस्तार किया. वर्ष 2000 में ‘झारखंड रीजनल कमेटी’ का गठन किया और बुंडू क्षेत्र में पहला सशस्त्र दस्ता बनाया.
  • वर्ष 2003-2004 के खूनी हमले: वर्ष 2003 और 2004 में पश्चिम सिंहभूम के बिटकिलसोय और बलिबा में हुए बड़े आईईडी हमलों में 55 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे. इन हमलों के बाद बेसरा का कद बढ़ा और उसे केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी) तथा ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो (ईआरबी) का प्रमुख बनाया गया.
  • वर्ष 2009 का चर्चित जेलब्रेक: जून 2009 में बिहार के लखीसराय कोर्ट में पेशी के दौरान लगभग 30 सशस्त्र माओवादियों ने मोटरसाइकिल से हमला कर दिया. बमबारी और फायरिंग के बीच एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई और माओवादी मिसिर बेसरा को छुड़ा ले गए. तब से वह लगातार फरार था.

लेवी वसूली था कमाई का जरिया, कोल्हान और सारंडा बना ठिकाना

भाकपा (माओवादी) का पोलित ब्यूरो सदस्य, केंद्रीय कमेटी सदस्य, केंद्रीय मिलिट्री सदस्य और ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो प्रमुख मिसिर बेसरा का कोल्हान और सारंडा के दुर्गम जंगल (जराईकेला, छोटानगरा, मनोहरपुर के सीमावर्ती क्षेत्र), तुम्बाहाका, पाटातोरोप, रेंगड़ाहातु और आंजेदबेड़ा जैसे गांव भ्रमणशील शरण स्थल रहे हैं. निर्माण ठेकेदारों और विकास योजनाओं से वसूली जाने वाली लेवी और रंगदारी उसकी कमाई का प्रमुख जरिया था.

वर्चस्व की जंग, असीम मंडल बनाम मिसिर बेसरा

जनवरी 2026 में शीर्ष माओवादी नेता अनल दा के मारे जाने के बाद संगठन में मिसिर बेसरा और पश्चिम बंगाल के एक करोड़ के इनामी माओवादी असीम मंडल उर्फ आकाश के बीच सत्ता संघर्ष छिड़ गया था. कुछ नक्सली मिसिर बेसरा का समर्थन कर रहे थे, तो कुछ असीम मंडल के साथ थे. इसका नतीजा यह हुआ कि संगठन बेहद कमजोर हो गया.

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