News Wave Special: पुलिस आधुनिकीकरण की ओर हेमंत सरकार: 1485 वाहनों के बाद अब स्टेट कमांड कंट्रोल सेंटर से होगी प्रदेश की हाईटेक निगरानी

SAURAV SINGH रांची: झारखंड की हेमंत सरकार पुलिस बल के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर तय करने जा...

state command control
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रांची: झारखंड की हेमंत सरकार पुलिस बल के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर तय करने जा रही है. 13 मार्च को राज्य पुलिस को 1485 नए वाहनों की सौगात देने के बाद, अब सरकार राजधानी रांची में अत्याधुनिक ‘स्टेट कमांड कंट्रोल सेंटर’ का लोकार्पण करने के लिए तैयार है. यह नया केंद्र न केवल कानून-व्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि आपातकालीन स्थितियों में क्विक रिस्पॉन्स’ के लिए गेम-चेंजर साबित होगा.

जगन्नाथपुर में बना हाईटेक स्टेट कमांड कंट्रोल सेंटर

राजधानी के जगन्नाथपुर मंदिर के समीप बनकर तैयार हुआ यह सेंटर सुरक्षा और यातायात प्रबंधन को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा. यह सेंटर विशेष रूप से उन इलाकों की निगरानी करेगा जहां अब राज्य की शक्ति का केंद्र स्थानांतरित हो चुका है. विधानसभा, हाई कोर्ट, प्रोजेक्ट भवन और पुलिस मुख्यालय जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों के पास होने के कारण यहां से सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकेगा.
आपातकालीन स्थिति में पुलिस बल और राहत टीमों का रिस्पॉन्स टाइम काफी कम हो जाएगा. वर्तमान में रांची की सुरक्षा व्यवस्था का पूरा भार कचहरी चौक स्थित कंपोजिट कंट्रोल रूम पर है, लेकिन शहर के विस्तार और बढ़ते ट्रैफिक के कारण कचहरी से शहर के दूसरे कोनों तक समय पर पहुंचना एक बड़ी चुनौती बनी हुई थी नया कमांड सेंटर इस दूरी और समय के अंतराल को खत्म करेगा.

नए कमांड सेंटर की 5 मुख्य विशेषताएं

– यहां 200 पुरुष और 100 महिला पुलिसकर्मियों के रहने की वर्ल्ड-क्लास व्यवस्था है.

– परिसर में ही दमकल की गाड़ियां, वज्र वाहन और क्यूआरटी वाहन हर समय अलर्ट मोड पर रहेंगे.

– जगन्नाथपुर और विधानसभा जाने वाली मुख्य सड़क पर स्थित होने के कारण यहां से वीआईपी मूवमेंट पर पैनी नजर रखी जाएगी.

– पूरे शहर के सीसीटीवी कैमरों की फीड को यहां से एडवांस सॉफ्टवेयर के जरिए मॉनिटर किया जाएगा.

– ट्रैफिक जाम की समस्या से निपटने के लिए रीयल-टाइम डेटा विश्लेषण की सुविधा.

2019 में नींव हेमंत सरकार ने दिया अंतिम रूप

इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की नींव साल 2019 में रखी गई थी. तत्कालीन अधिकारियों के सुझाव और दौरे के बाद हेमंत सोरेन सरकार ने इस परियोजना को प्राथमिकता दी और रिकॉर्ड समय में इसका निर्माण पूरा कराया.

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