हजारीबाग: आत्मसमर्पित नक्सली बंदियों के पुनर्वास की दिशा में बड़ी पहल

Hazaribagh: आत्मसमर्पित नक्सली बंदी कारा, हजारीबाग में शुक्रवार को मुर्गी पालन (पोल्ट्री फार्मिंग) और सिलाई-कटिंग संबंधी व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया...

हजारीबाग
नक्सली बंदियों के पुनर्वास की दिशा में बड़ी पहल

Hazaribagh: आत्मसमर्पित नक्सली बंदी कारा, हजारीबाग में शुक्रवार को मुर्गी पालन (पोल्ट्री फार्मिंग) और सिलाई-कटिंग संबंधी व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन DC हेमंत सती ने किया. प्रशिक्षण जन शिक्षण संस्थान, हजारीबाग द्वारा संचालित किया जाएगा.

80 दिनों तक मिलेगा प्रशिक्षण

DC ने बताया कि 80 दिनों तक चलने वाले इस प्रशिक्षण में 60 आत्मसमर्पित नक्सली बंदी (महिला एवं पुरुष) भाग लेंगे. उन्हें मुर्गी पालन और सिलाई-कटिंग से जुड़ी व्यावहारिक और तकनीकी जानकारी दी जाएगी, ताकि वे भविष्य में स्वरोजगार शुरू कर सकें.

मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास

हेमंत सती ने कहा कि राज्य सरकार की समर्पण नीति का उद्देश्य आत्मसमर्पित बंदियों को सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है. कौशल विकास के माध्यम से उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलेगा.

रोजगार योजना से भी जोड़ा जाएगा

प्रशिक्षण पूरा होने के बाद प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र दिया जाएगा, साथ ही मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना से जोड़कर स्वरोजगार के लिए ऋण सुविधा उपलब्ध कराने की पहल की जाएगी.

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बंदियों ने जताया आभार

प्रशिक्षण शिविर में शामिल आत्मसमर्पित नक्सली बंदियों ने जिला प्रशासन की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और सम्मानजनक पुनर्वास का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा. कार्यक्रम में जेल अधीक्षक चंद्रशेखर प्रसाद सुमन समेत अन्य अधिकारी और प्रशिक्षक मौजूद रहे.

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