Chatra: सड़क की बदहाली से ग्रामीण परेशान, अधूरा निर्माण बना मुसीबत

Chatra: जिले के ग्रामीण इलाकों में विकास सिर्फ कागजों पर ही दिखाई देता है. इसका जीता-जागता उदाहरण करमा मोड़ से जसपुर तक...

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Chatra: Villagers distressed by the poor condition of the road

Chatra: जिले के ग्रामीण इलाकों में विकास सिर्फ कागजों पर ही दिखाई देता है. इसका जीता-जागता उदाहरण करमा मोड़ से जसपुर तक जाने वाली सड़क है. अर्धनिर्मित और गड्ढों से भरी यह सड़क बरसात में तालाब का रूप ले लेती है और ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बनी हुई है. यह सड़क गड़िया, अमकुदर, पथेल, पचफेड़ी, बघमरी, बनियांबंध, सिकीद, केंदुआ सहोर, जसपुर, सरैया, केंद्री, लारा, लूटूदाग, मंझोलिया सहित झारखंड-बिहार सीमा से सटे दर्जनों गांवों को जोड़ती है. लेकिन इसकी बदहाल स्थिति के कारण रोजाना हजारों लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

काम रुका, उम्मीदें टूटीं

जब इस सड़क का निर्माण शुरू हुआ था, तब पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर थी. लेकिन बीच में ही निर्माण कार्य बंद हो गया. तब से ग्रामीण इस उम्मीद में हैं कि अधूरी सड़क का निर्माण कब पूरा होगा. स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण क्यों रुका, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है. संवेदक की लापरवाही है या विभाग की उदासीनता, यह तो जांच का विषय है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि सड़क आज तक पूरी क्यों नहीं बन सकी. यही सवाल हर उस राहगीर के मन में है, जो रोज इस कीचड़ भरे रास्ते से गुजरने को मजबूर है.

शिक्षा और व्यापार पर भी असर

सड़क की बदहाल स्थिति का असर स्कूली बच्चों, कॉलेज के छात्रों, मरीजों और व्यापारियों पर भी पड़ रहा है. हल्की बारिश होते ही गड्ढे पानी से भर जाते हैं और दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है. ग्रामीणों का आरोप है कि जनप्रतिनिधि केवल फोटो खिंचवाकर विकास का दावा करते हैं, जबकि जमीनी हकीकत करमा मोड़ से जसपुर तक की सड़क पर साफ दिखाई देती है.

ग्रामीणों का कहना है कि यदि संवेदक दोषी है तो उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही. वहीं यदि विभाग की लापरवाही है तो पुराना ठेका रद्द कर नया टेंडर क्यों नहीं निकाला जा रहा. ग्रामीणों का कहना है कि जब तक इस सड़क का निर्माण पूरा नहीं होगा, तब तक क्षेत्र के दर्जनों गांवों के लोगों को मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ेगा और विकास के दावे केवल नारों तक ही सीमित रहेंगे.

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