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बोकारो में पुलिस के बाद शिक्षा विभाग में बड़ा घोटाला, मृत शिक्षक के नाम पर लाखों रुपया की अवैध निकासी

Bokaro: जिले में पुलिस महकमे के बहुचर्चित वित्तीय घोटाले के बाद अब शिक्षा विभाग में भी एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है....

बोकारो

Bokaro: जिले में पुलिस महकमे के बहुचर्चित वित्तीय घोटाले के बाद अब शिक्षा विभाग में भी एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. पेटरवार प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय, सदमाकला के एक मृत शिक्षक के नाम पर 14.65 लाख से अधिक की राशि की अवैध निकासी कर ली गई है. शिक्षक की मृत्यु के सालों बाद उनके अंतर वेतन निकासी वृद्धि के नाम पर यह सरकारी राशि सीधे एक कर्मी के निजी खाते में ट्रांसफर की गई. मामला उजागर होते ही शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है.

2021 में हुई थी शिक्षक की मृत्यु, 2024 से 2026 के बीच निकाली गई रकम

जानकारी के अनुसार, यह मामला उत्क्रमित मध्य विद्यालय, सदमाकला (पेटरवार) में पदस्थापित रहे दिवंगत शिक्षक संतोष कुमार शर्मा से जुड़ा है. संतोष कुमार शर्मा का निधन 14 अगस्त 2021 को ही हो गया था. इसके बावजूद, वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान उनके नाम से फर्जी कागजात तैयार कर तीन अलग-अलग बिलों के जरिए कुल 14.65 लाख रुपया की अवैध निकासी कर ली गई.

तीन किश्तों में हुई अवैध निकासी का विवरण

– बिल संख्या 63/2024-25: 5.16 लाख

– बिल संख्या 77/2024-25: 4.31 लाख

– बिल संख्या 22/2025-26: 5. 17 लाख

बिलिंग असिस्टेंट पर निजी खाते में पैसे भेजने का आरोप

मामले में विभाग के बिलिंग असिस्टेंट मुकेश कुमार पर मुख्य आरोप है. आरोप है कि मुकेश कुमार ने दिवंगत शिक्षक के एरियर (अंतर वेतन वृद्धि) के नाम पर फर्जी बिल पास करवाए और तीनों किश्तों की राशि शिक्षक के परिजनों या वैध खाते के बजाय सीधे अपने निजी बैंक खाते में ट्रांसफर करा ली.

प्रशासनिक लापरवाही और फर्जी सर्टिफिकेट पर उठे सवाल

इस पूरे मामले ने प्रशासनिक जांच प्रक्रिया की पोल खोलकर रख दी है.सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि एक ही दावे पर तीन अलग-अलग समय पर बिल बनाकर कोषागार कैसे भेज दिए गए और उन्हें स्वीकृति भी मिल गई. कोषागार भेजने से पहले संबंधित अधिकारियों ने बिलों और कागजातों का भौतिक सत्यापन क्यों नहीं किया? जांच के दौरान यह चौंकाने वाली बात भी सामने आई है कि संबंधित अवैध भुगतानों को नियमसंगत ठहराते हुए एक प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया गया था, जिससे विभाग के कुछ अन्य बड़े अधिकारियों की संलिप्तता की आशंका भी जताई जा रही है.

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