Ranchi: झारखंड कांग्रेस के भीतर चल रहा घमासान अब और भी दिलचस्प मोड़ पर आ गया है. पार्टी के सख्त तेवर के आगे झुकने के बजाय पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी ने अपने आक्रामक तेवर बरकरार रखते हुए 28 पन्नों का एक सीलबंद जवाब प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश को सौंप दिया है. इस जवाब के जरिए उन्होंने पार्टी के भीतर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए अपनी बेबाकी का खुलकर इजहार किया है.

डिसिप्लिन तोड़ना मेरी फितरत नहीं
केएन त्रिपाठी ने दो टूक शब्दों में कहा, मैं एयरफोर्स से आया हूं, अनुशासन तोड़ना मेरी आदत नहीं है. मैं कांग्रेस पार्टी का एक सच्चा और निष्ठावान सिपाही हूं. उनके इस बयान ने साफ कर दिया है कि वे अपनी बात पर पूरी तरह अडिग हैं और पार्टी के भीतर अपनी वैचारिक स्वतंत्रता के लिए किसी भी दबाव में झुकने को तैयार नहीं हैं.


क्या था पूरा विवाद?
यह पूरा सियासी बवाल 28 जुलाई को पलामू में हुई एक हाई-प्रोफाइल प्रेस कॉन्फ्रेंस से शुरू हुआ था. केएन त्रिपाठी ने राज्य की कानून-व्यवस्था, पुलिस और गृह विभाग की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला था. प्रदेश कांग्रेस ने इसे गंभीरता से लेते हुए तुरंत कड़ा रुख अपनाया था. पार्टी का तर्क था कि एक लोकतांत्रिक दल होने के नाते आंतरिक मंचों पर अपनी बात रखने की पूरी आजादी है, लेकिन खुले मंच से ऐसी बयानबाजी करना, जिससे सीधे तौर पर विपक्ष को फायदा पहुंचे, कतई स्वीकार्य नहीं है. पार्टी ने इसे महागठबंधन की एकजुटता के खिलाफ मानते हुए उनसे एक सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया था.

