West Singhbhum: बंदगांव प्रखंड के लुपुंगकेल गांव की रहने वाली अपोलोनिया डेरे ने संघर्ष, मेहनत और समाज सेवा के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई है. उनका सफर महिला सशक्तीकरण, ग्रामीण विकास और सामाजिक बदलाव की प्रेरणादायक मिसाल है.

कठिन परिस्थितियों से शुरू हुआ सफर
ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ीं अपोलोनिया डेरे को शुरुआत में जेंडर असमानता, सामाजिक रूढ़ियों और विरोध का सामना करना पड़ा. समाज में महिलाओं के नेतृत्व को लेकर बनी धारणाओं के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी और लगातार समाज सेवा के रास्ते पर आगे बढ़ती रहीं.

मनरेगा महिला मेट से मिली नई पहचान
लीड्स (LEADS) संस्था और प्रखंड प्रशासन के सहयोग से ग्रामसभा ने उन्हें मनरेगा महिला मेट की जिम्मेदारी दी. उन्होंने पूरी ईमानदारी से काम करते हुए ग्रामीणों को रोजगार योजनाओं से जोड़ा और विकास कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई.


आत्मनिर्भरता की मिसाल
समाज सेवा के साथ उन्होंने खुद को आत्मनिर्भर भी बनाया है. वे मुर्गी पालन और बकरी पालन का व्यवसाय चला रही हैं. इसके अलावा पंचायत के एक विद्यालय में शिक्षिका के रूप में बच्चों के भविष्य को संवारने का काम कर रही हैं.
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प्रेरणा बनी अपोलोनिया डेरे की कहानी
मनरेगा महिला मेट से लेकर वार्ड सदस्य, उद्यमी, जेंडर एक्सपर्ट और शिक्षिका तक का उनका सफर बताता है कि मजबूत इच्छाशक्ति और मेहनत से हर चुनौती को पार किया जा सकता है. उनकी उपलब्धियां पूरे पश्चिमी सिंहभूम जिले के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं.

