रांची: झारखंड सरकार के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने राज्य में सर्पदं के बढ़ते मामलों और इससे होने वाली मृत्यु दर को नियंत्रित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. झारखंड सरकार ने आधिकारिक अधिसूचना जारी करते हुए अब सर्पदंश के मामलों और इससे होने वाली मौतों को अधिसूचित बीमारी घोषित कर दिया है.

2030 तक मौतों को आधा करने का लक्ष्य:
भारत सरकार के ‘राष्ट्रीय कार्य योजना 2030 के अनुरूप, झारखंड सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक सर्पदंश से होने वाली मौतों और विकलांगता में 50% तक की कमी लाना है. आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर साल लगभग 30-40 लाख सर्पदंश के मामले सामने आते हैं, जिनमें से 58,000 लोगों की जान चली जाती है. झारखंड में मानसून और गर्मी के मौसम में ये मामले ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में अत्यधिक बढ़ जाते हैं. अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि झारखंड के ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग सांप के काटने पर अस्पताल जाने के बजाय झाड़-फूंक ओझा-गुणी और पारंपरिक उपचार का सहारा लेते हैं. समय पर सही इलाज न मिलना ही राज्य में सर्पदंश से होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण है.
अधिसूचना के मुख्य बिंदु और नए नियम:
– अब राज्य के सभी सरकारी अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, निजी अस्पताल, नर्सिंग होम, रेलवे व आर्मी अस्पताल, और आयुष संस्थानों के लिए सर्पदंश के हर मामले की जानकारी देना अनिवार्य होगा.
– सभी स्वास्थ्य संस्थानों को हर महीने की 5 तारीख और 20 तारीख तक अपने क्षेत्र के सिविल सर्जन को रिपोर्ट सौंपनी होगी.
– सर्पदंश से जुड़ी सभी जानकारियों को IDSP-IHIP पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य होगा. इसके लिए संस्थानों को एक अलग रजिस्टर भी संधारित करनी होगी.
– सरकार ने निर्देश दिया है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर मेडिकल कॉलेजों तक एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए.
– यह अधिसूचना Clinical Establishment Act 2010 के तहत जारी की गई है। यदि कोई निजी या सरकारी संस्थान सर्पदंश के मामले को छिपाता है या रिपोर्ट नहीं करता है, तो इसे नियमों का उल्लंघन माना जाएगा.

