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मां शैलपुत्री की कथा: नवरात्रि के पहले दिन करें यह पाठ, हर कष्ट से मिलेगी मुक्ति

    News DESK: चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व 19 मार्च से शुरू हो चुका है. पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम...

 

 

News DESK: चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व 19 मार्च से शुरू हो चुका है. पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की विशेष पूजा की जाती है. इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर मां को प्रसन्न करने की कोशिश करते हैं. मान्यता है कि जो भक्त पूरे विश्वास और भक्ति के साथ मां शैलपुत्री की आराधना करते हैं, उनके जीवन में खुशहाली, शांति और समृद्धि बनी रहती है,और साथ ही भक्तों पर मां की कृपा बनी रहती है.

पूजा के समय मां शैलपुत्री की कथा का पाठ करना बेहद शुभ माना जाता है. मान्यता है कि कथा सुनने या पढ़ने से पूजा सफल मानी जाती है और भक्त के जीवन में सुख-समृद्धि का संचार होता है. आइए जानते हैं मां शैलपुत्री की पावन कथा.

मां शैलपुत्री की पावन कथा: सती से शैलपुत्री बनने तक की पूरी कहानी

धार्मिक कथाओं के अनुसार, प्रजापति दक्ष ने एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया. उन्होंने इस यज्ञ में सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित किया, लेकिन भगवान शिव को नहीं बुलाया. इसकी वजह यह थी कि दक्ष, शिव जी को पसंद नहीं करते थे और उनके प्रति मन में नाराजगी रखते थे.

जब माता सती को इस यज्ञ के बारे में पता चला, तो उन्होंने वहां जाने की इच्छा जताई. भगवान शिव ने बिना बुलावे जाने को उचित नहीं बताया, लेकिन सती अपने मायके जाने के लिए दृढ़ रहीं और अंततः यज्ञ स्थल पर पहुंच गईं. वहां जाकर उन्होंने देखा कि न तो उनका सम्मान किया जा रहा है और न ही भगवान शिव का उल्टा, उनके सामने ही शिव जी के प्रति अपमानजनक व्यवहार किया गया. यह सब देखकर माता सती बेहद व्यथित हो गईं.

अपने पति के अपमान को सहन न कर पाने के कारण, उन्होंने उसी यज्ञ अग्नि में अपने प्राण त्याग दिए. इस घटना से क्रोधित होकर भगवान शिव ने तांडव किया और दक्ष का अंत कर दिया. इसके बाद सती ने पुनर्जन्म लेकर हिमालय के घर जन्म लिया और शैलपुत्री के नाम से विख्यात हुईं. यही मां शैलपुत्री, मां दुर्गा का प्रथम स्वरूप मानी जाती हैं, जिनकी पूजा नवरात्रि के पहले दिन की जाती है.

मां शैलपुत्री का स्वरूप: जानें उनके दिव्य रूप और पूजन का महत्व

मां शैलपुत्री को सरल, शांत और दिव्य रूप में पूजा जाता है. उनका वाहन वृषभ (बैल) है, जो स्थिरता और शक्ति का प्रतीक माना जाता है. मां के एक हाथ में त्रिशूल होता है, जो साहस और रक्षा का संकेत देता है, जबकि दूसरे हाथ में कमल सुशोभित रहता है, जो पवित्रता और आस्था को दर्शाता है. उनके मस्तक पर अर्धचंद्र विराजमान होता है, जो उनके दिव्य तेज को और बढ़ाता है.

मान्यता है कि जो भक्त पूरे श्रद्धा भाव से मां शैलपुत्री की पूजा और व्रत करते हैं, उनके जीवन से नकारात्मकता दूर होती है और सुख-शांति का वास होता है.

मां शैलपुत्री के शक्तिशाली मंत्र: पूजा में करें जप, मिलेगा विशेष आशीर्वाद

मां शैलपुत्री की आराधना के समय इन पवित्र मंत्रों का जप करना शुभ माना जाता है—

  • वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
  • ऊँ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
  • या देवी सर्वभू‍तेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

DISCLAIMER: यह जानकारी विभिन्न धार्मिक मान्यताओं और स्रोतों पर आधारित है, जिसे केवल सामान्य जानकारी के लिए प्रस्तुत किया गया है। कृपया इसे अंतिम सत्य न मानें और अपने विवेक का उपयोग करें.

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