Ranchi: JSSC-CGL के जरिए सरकारी नौकरी पाने वाले चयनित अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अपनी नौकरी और भविष्य को लेकर चिंता जताई है. अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर कहा है कि मौजूदा विवाद के कारण वे मानसिक दबाव में हैं और उन्हें अपने भविष्य की चिंता सता रही है. अभ्यर्थियों का कहना है कि उनका चयन निर्धारित प्रक्रिया के तहत हुआ है. उन्होंने कहा कि कई अभ्यर्थी आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से हैं. कुछ ने सरकारी नौकरी मिलने की उम्मीद में अपनी पुरानी नौकरी तक छोड़ दी थी. ऐसे में अगर भर्ती प्रक्रिया पर कोई फैसला होता है, तो उनके सामने रोजगार और परिवार चलाने का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है.

हाईकोर्ट के आदेश के बाद हुई नियुक्ति
चयनित अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री से कहा है कि JSSC-CGL से जुड़े किसी भी फैसले से पहले उनके हितों और भविष्य को भी ध्यान में रखा जाए. उनका कहना है कि चयन प्रक्रिया को लेकर न्यायालय में मामला चला और हाईकोर्ट के आदेश के बाद ही परीक्षा का परिणाम जारी किया गया. इसके बाद सरकार की ओर से 1932 चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिया गया.
छात्रों की मांग से बढ़ा विवाद
इधर रांची में चल रहे छात्र आंदोलन में JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने की मांग लगातार उठ रही है. आंदोलनकारी छात्रों का आरोप है कि परीक्षा में बड़े स्तर पर अनियमितता हुई है. उनकी मांग है कि परीक्षा रद्द कर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों पर कार्रवाई हो. वहीं सरकार का कहना है कि परीक्षा में पेपर लीक होने की पुष्टि CID की जांच में नहीं हुई थी. हाईकोर्ट के आदेश के बाद ही परिणाम जारी किया गया. सरकार का यह भी कहना है कि मामला अदालत में लंबित है, इसलिए इस पर फैसला लेना न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा विषय है.
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JPSC मामले से भी जुड़ा JSSC-CGL विवाद
JSSC-CGL विवाद को लेकर 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा मामले में गिरफ्तार अभय कुमार तिवारी का नाम भी सामने आया है. वह JSSC-CGL के माध्यम से प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के पद पर चयनित हुआ था और पोड़ैयाहाट में पदस्थापित था. जांच के दौरान उसके कुछ करीबी रिश्तेदारों के भी JSSC-CGL के जरिए अलग-अलग पदों पर चयनित होने की जानकारी सामने आई. हालांकि CID की जांच में अभ्यर्थियों से नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का पता चला, लेकिन पेपर लीक होने का प्रमाण नहीं मिला.

