BREAKING- सुप्रीम कोर्ट ने मांगी कुख्यात सुरेंद्र बंगाली की क्रिमिनल हिस्ट्री, रिहाई की मांग वाली याचिका पर हुई सुनवाई 

विनीत आभा उपाध्याय Ranchi: दशकों पहले रांची में कुख्यात रहे सुरेंद्र सिंह रौतेला उर्फ सुरेंद्र बंगाली ने अपनी रिहाई के लिए सुप्रीम...

image: AI Generated

विनीत आभा उपाध्याय 

Ranchi: दशकों पहले रांची में कुख्यात रहे सुरेंद्र सिंह रौतेला उर्फ सुरेंद्र बंगाली ने अपनी रिहाई के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटया है. सुरेंद्र बंगाली की रिहाई की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने प्रार्थी के अधिवक्ता को यह बताने का निर्देश दिया है कि उसके विरुद्ध अब तक कितने आपराधिक मामले निष्पादित हो चुके हैं और कितने आपराधिक मामले लंबित हैं. सुप्रीम कोर्ट यह जानकारी मिलने के बाद अब 30 सितम्बर को इस मामले में सुनवाई करेगा. 

जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच में हुई सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच में सुरेंद्र बंगाली की याचिका पर सुनवाई हुई. जेल में बंद सुरेंद्र बंगाली ने झारखंड हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें सुरेंद्र बंगाली की रिहाई(प्री मेच्योर रिलीज) के लिए राज्य सरकार को छह महीने के अंदर विचार करने का निर्देश दिया गया था. सुप्रीम कोर्ट से पहले सुरेंद्र बंगाली ने तीन बार अपनी रिहाई के लिए झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटटखटाया था. उसकी याचिका पर हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की कोर्ट में सुनवाई हुई थी. 

Read Also: धनबाद के विमला मेट कोक के मालिकों को बेल देने से सुप्रीम कोर्ट का इंकार, 5 करोड़ की ठगी का है केस

हत्या के मामले में सुनाई गई थी फांसी की सजा

सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को यह निर्देश दिया था कि 1984 में बनी निति के आधार पर सुरेंद्र बंगाली को सजा पूरी करने और अन्य तथ्यों को देखते हुए रिहा (प्री मेच्योर रिलीज) करने पर छह महीने में विचार करे. दरअसल रांची सिविल कोर्ट ने लालपुर थाना के कांड संख्या-31/1996 में हत्या से जुड़े मामले में सुरेंद्र सिंह बंगाली को दोषी करार देने के बाद सुरेंद्र बंगाली को फांसी की सजा सुनायी थी.  लेकिन इस बीच वर्ष 2001 में सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र बंगाली की फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया था. जिसके बाद से सुरेंद्र बंगाली जेल की सलाखों के पीछे है. करीब 25 साल से ज्यादा समय तक अपने जुर्म की सजा काटने के बाद सुरेंद्र बंगाली ने अपनी रिहाई के लिए शीर्ष अदालत में गुहार लगाई है. राज्य सजा पुनरीक्षण बोर्ड ने सुरेंद्र बंगाली की रिहाई के आवेदन पर निर्णय नहीं लिया गया था और उसकी रिहाई की मांग ठुकरा दी गई है.

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *