AI कंटेंट पर सरकार सख्त, सोशल मीडिया को दिखाना होगा लेबल, 3 घंटे में हटाने होंगे आपत्तिजनक पोस्ट

National News: भारत सरकार ने सोशल मीडिया पर तेजी से बढ़ रहे AI-जनरेटेड कंटेंट को लेकर सख्त रुख अपनाया है. हालिया फैसले में सरकार ने एक नया नियम प्रस्तावित किया है, जिसके तहत अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को AI से बने या बदले गए किसी भी कंटेंट को साफ-साफ पहचान के साथ दिखाना होगा.

“AI Generated” लिख देना काफी नहीं

इस नए नियम के मुताबिक, केवल “AI Generated” लिख देना काफी नहीं होगा, बल्कि हर प्लेटफॉर्म को ऐसा दिखने वाला टैग और मेटा डाटा जोड़ना होगा, जिससे आम यूजर एक नजर में समझ सके कि कंटेंट असली है या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तैयार किया गया है. यह नियम तस्वीर, वीडियो और ऑडियो सभी तरह के कंटेंट पर लागू होगा.

आपत्तिजनक AI कंटेंट पर रोक लगाना मकसद

PTI की रिपोर्ट के अनुसार, Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY) ने सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 में संशोधन के लिए ये नए ड्राफ्ट नियम तैयार किए हैं. इनका मकसद सोशल मीडिया पर फैल रहे फेक, भ्रामक और आपत्तिजनक AI कंटेंट पर रोक लगाना है.

AI कंटेंट को लेकर नए नियम क्या कहते हैं?

  • नए नियमों के तहत, AI से बना हर कंटेंट स्पष्ट रूप से लेबल किया जाना जरूरी होगा.
  • यह लेबल या पहचान छुपाई नहीं जा सकेगी और न ही हटाई जा सकेगी.
  • अगर कंटेंट तस्वीर है, तो लेबल कम से कम 10 प्रतिशत हिस्से में दिखना चाहिए.
  • वीडियो या ऑडियो क्लिप में यह पहचान शुरुआती 10 प्रतिशत हिस्से में नजर आनी चाहिए.
  • इसका उद्देश्य यही है कि यूजर को अंदाजा न लगाना पड़े, बल्कि उसे तुरंत सच्चाई पता चल जाए.
  • इसके अलावा, अगर कोई पोस्ट आपत्तिजनक पाई जाती है और उसे फ्लैग किया जाता है, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को 3 घंटे के भीतर उसे हटाना अनिवार्य होगा.

प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ेगी जिम्मेदारी

नए नियमों के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को यूजर्स से यह भी पूछना होगा, कि जो कंटेंट वे अपलोड कर रहे हैं, वह असली है या AI-जनरेटेड. इसके बाद प्लेटफॉर्म्स अपने स्तर पर उस दावे की जांच करेंगे. साथ ही, ऑटोमेटेड टूल्स का इस्तेमाल कर गैरकानूनी, भ्रामक या शोषण से जुड़ा AI कंटेंट पहले ही पकड़कर रोकना होगा. हर तीन महीने में यूजर्स को इन नियमों और इनके उल्लंघन पर लगने वाली सजा की याद भी दिलाई जाएगी. यह बदलाव खास तौर पर उन बड़े प्लेटफॉर्म्स के लिए अहम है, जहां सबसे ज्यादा कंटेंट शेयर होता है, जैसे Facebook, Instagram, YouTube और X.

3 घंटे के भीतर करनी होगी कार्रवाई

सरकार ने AI कंटेंट से जुड़े नियमों के साथ कंटेंट मॉडरेशन की समय-सीमा भी कम कर दी है. अब कुछ मामलों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को यूजर की शिकायत या कानूनी आदेश पर 3 घंटे के भीतर कार्रवाई करनी होगी, जो पहले 36 घंटे थी. अन्य मामलों में समय-सीमा 15 दिन से घटाकर 7 दिन और 24 घंटे से घटाकर 12 घंटे कर दी गई है.

नए नियमों के तहत गैरकानूनी गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाला AI-जनरेटेड कंटेंट किसी भी अन्य अवैध कंटेंट की तरह माना जाएगा. इसमें बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री, फर्जी पहचान, भ्रामक रिकॉर्ड या हथियारों और विस्फोटकों से जुड़ा कंटेंट शामिल है.

डीपफेक मामलों के बाद सरकार का सख्त कदम

दरअसल, बीते कुछ समय में कई हाई-प्रोफाइल डीपफेक मामले सामने आए हैं, जिनमें नकली वीडियो और ऑडियो का इस्तेमाल कर लोगों की छवि खराब की गई. इसी को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है. सरकार को आशंका है कि अगर AI से बना फेक कंटेंट बिना पहचान के फैलता रहा, तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है.