Ajay Dayal

Ranchi : स्मार्टफोन की स्क्रीन पर चमकता एक राइट स्वाइप और जिंदगी हमेशा के लिए ब्लैकआउट. कोयलांचल धनबाद में इन दिनों वर्चुअल दुनिया का सबसे खौफनाक और अमानवीय खेल खेला जा रहा है. सोशल मीडिया और ग्राइंडर व पोलो जैसे समलैंगिक डेटिंग ऐप्स अब सिर्फ पार्टनर तलाशने का जरिया नहीं रहे, बल्कि ये बेगुनाह युवाओं को मौत के जाल में धकेलने वाले किलिंग ग्राउंड बन चुके हैं. चौकिए मत, धनबाद में पहले से एचआईवी संक्रमित कुछ साइको-क्रिमिनल्स अपनी जानलेवा बीमारी को हथियार बनाकर मासूम और पढ़े लिखे एमएसएम ( Men who have sex with Men ) युवाओं में जानबूझकर संक्रमण बांट रहे हैं. यह कोई अनजाने में हुई चूक नहीं, बल्कि ठंडे दिमाग से रची जा रही एक ऐसी घिनौनी साजिश है, जिसने स्वास्थय महकमे से लेकर पूरे समाज की नींद उड़ा दी है. धनबाद मेडिकल कॉलेज के एआरटी सेंटर में जब कुछ पीड़ित युवाओं की काउंसिलिंग हुई, तो डॉक्टरों के सामने जो सच आया, उसने मेडिकल एक्सपर्ट्स के भी रोंगटे खड़े कर दिए.
भरोसे की आड़ में बायोलॉजिकल मर्डर
इस डिजिटल शिकारगाह की स्क्रिप्ट बेहद शातिर और खौफनाक है. जालसाज सबसे पहले डेटिंग ऐप्स पर शिकार तलाशते हैं. इसके बाद शुरू होता है मीठी बातों, वीडियो कॉल्स और मुलाकातों का वो सिलसिला, जिससे सामने वाले का भरोसा पूरी तरह जीत लिया जायें. जब पीड़ित युवा इनके झांसे में आकर पूरी तरह सरेंडर कर देता है, तब आरोपी अपनी एचआईवी पॉजिटिव होने की सच्चाई छिपाकर उससे शारीरिक संबंध बनाते हैं. यह जानते हुए भी कि उनका एक कदम किसी की जिंदगी तबाह कर सकता है. वे बिना किसी सुरक्षा के संबंध बनाते हैं. यह सीधा सीधा एक बायोलॉजिकल मर्डर की तरह है. जहां जहर धीरे धीरे शरीर में उतारा जाता है.
मुझे एचआइवी निकला, तुम भी टेस्ट करा लो
इस पूरे खेल का सबसे वीभत्स और डरावना पहलू संबंध बनाने के कुछ दिनों बाद शुरू होता है. जब शिकार जाल में फंस चुका होता है, तो आरोपी खुद ही पीड़ित को फोन या मैसेज करता है. बेहद सधे हुए अंदाज में बहाना बनाया जाता है कि मेरी तबीयत अचानक खराब हो गई थी, जब मैंने टेस्ट कराया तो मैं एचआईवी पॉजिटिव निकला हूं. तुम भी एक बार अपनी जांच करा लो. यह सुनते ही पीड़ित के पैरों तले जमीन खिसक जाती है. घबराहट और खौफ के साये में जब वह अस्पताल भागता है और उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आती है. तब तक सब कुछ खत्म हो चुका होता है. पीड़ित को तब एहसास होता है कि जिसे वह प्यार या अट्रैक्शन समझ रहा था, वह दरअसल उसकी जिंदगी को दीमक लगाने की एक सोची-समझी साजिश थी.
लोक-लाज की बेड़ियां और बेखौफ घूमते मुजरिम
अस्पताल के आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि धनबाद में हर महीने औसतन 2 से 3 नए समलैंगिक युवा एचआईवी संक्रमण का शिकार हो रहे हैं. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि संक्रमित होने वाले अधिकांश युवा हाई-प्रोफाइल, पढ़े-लिखे और संभ्रांत परिवारों से हैं. अपराधी इसी बात का फायदा उठा रहे हैं. उन्हें पता है कि भारतीय समाज में समलैंगिकता को लेकर आज भी जो सामाजिक हिचक और रूढ़िवादिता है, उसके कारण पीड़ित युवा बदनामी और लोक-लाज के डर से कभी पुलिस के पास नहीं जाएंगे. वे न तो एफआईआर दर्ज कराते हैं और न ही कोई कानूनी कदम उठाते हैं. पीड़ितों की यही लाचारी और खामोशी इन अपराधियों के लिए सबसे बड़ा सुरक्षा कवच बन गई है, जिससे शह पाकर वे अगले शिकार की तलाश में फिर से ऐप पर ऑनलाइन हो जाते हैं.
अलर्ट मोड पर स्वास्थय विभाग
धनबाद स्वास्थय विभाग इस नए ट्रेंड से बेहद चिंतित है. एआरटी सेंटर के विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक बीमारी के फैलने का नहीं, बल्कि एक गंभीर साइबर और सोशल क्राइम का है. डॉक्टरों और काउंसिलर्स ने युवाओं से अपील की है कि वे वर्चुअल दुनिया के अजनबियों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें.
एक्सपर्ट एडवाइस
साइबर एक्सपर्ट पीयुष पांडेय के अनुसार डेटिंग ऐप्स पर किसी से भी मिलने से पहले सतर्क रहें और असुरक्षित शारीरिक संबंधों से पूरी तरह परहेज करें. अगर कोई अनहोनी होती भी है, तो डरे नहीं. लोक-लाज से ऊपर आपकी जिंदगी है. तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और ऐसे अपराधियों को बेनकाब करने के लिए आवाज उठाएं, क्योंकि आपकी एक खामोशी किसी और की जिंदगी को भी इस नरक में धकेल सकती है.
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