झारखंड-बिहार NH पर ‘सफेदपोश’ गो-तस्करी सिंडिकेट का कब्जा, कानून को ठेंगा दिखा रहा गो तस्करों का नेटवर्क; मोहरों पर गाज, आका अब भी आजाद

Hazaribagh : हजारीबाग का बरही इलाका एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय गो-तस्करी के सबसे बड़े सेफ जोन के रूप में उभर...

Hazaribagh : हजारीबाग का बरही इलाका एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय गो-तस्करी के सबसे बड़े सेफ जोन के रूप में उभर रहा है. नेशनल हाईवे के रास्ते झारखंड से बिहार और पश्चिम बंगाल तक फैले इस अंडरग्राउंड सिंडिकेट ने पुलिसिया गश्त और प्रशासनिक चौकसी पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं. चर्चाओं का बाजार गर्म है कि इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड कोई और नहीं, बल्कि पर्दे के पीछे छिपा एक रसूखदार ‘खां साहब’ है, जिसके रडार पर पूरा रूट चलता है. हैरानी की बात यह है कि कई बार नाम उछलने के बाद भी इस सफेदपोश तक कानून के हाथ नहीं पहुंच पाए हैं.

रात के अंधेरे में हाईवे पर क्रूरता का ‘करोड़ों का खेल’

ग्राउंड जीरो से मिल रही रिपोर्ट के मुताबिक, यह कोई छिटपुट तस्करी नहीं बल्कि एक पूरी तरह से संगठित कॉरपोरेट स्टाइल का नेटवर्क है. हर दिन आधी रात से लेकर तड़के सुबह तक, दर्जनों ट्रक और कंटेनर मवेशियों को ठूंस-ठूंस कर भरते हैं और बेखौफ होकर नेशनल हाईवे से गुजरते हैं. बरही, चौपारण और बाराचट्टी का यह पूरा बेल्ट इस अवैध धंधे का मुख्य ‘कॉरिडोर’ बन चुका है. गाड़ियों में पशुओं को इस बेरहमी से लादा जाता है कि कई बार दम घुटने से उनकी मौत तक हो जाती है, जो पशु क्रूरता की सारी हदें पार करता है.

कड़वा सच

हर मोड़ पर तैनात पुलिस और जांच चौकियों को चकमा देकर रोजाना मवेशियों से लदे वाहन सरपट दौड़ रहे हैं. पुलिस की कार्रवाई सिर्फ चंद हजार के भाड़े पर चलने वाले ड्राइवरों और खलासियों तक सिमट कर रह गई है.

दिखावे की रेड और सिंडिकेट का ‘हाईटेक’ तरीका

स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि पुलिस की कार्रवाई महज कागजी खानापूर्ति और आंकड़ों का खेल बनकर रह गई है. जब भी दबाव बढ़ता है, किसी एक गाड़ी को पकड़कर कोरम पूरा कर लिया जाता है, जबकि सिंडिकेट के असली आका सुरक्षित अपनी तिजोरियां भर रहे हैं. सूत्रों का कहना है कि यह गैंग बेहद हाईटेक तरीके से काम करता है. पुलिस की लोकेशन ट्रैक करने के लिए बकायदा ‘लाइनर’ सक्रिय रहते हैं, जो पल-पल की खबर तस्करों की गाड़ियों तक पहुंचाते हैं. बिना किसी बड़े प्रशासनिक या राजनैतिक संरक्षण के इतने बड़े पैमाने पर करोड़ों का यह टर्नओवर चलना नामुमकिन है.

आर-पार की जांच की मांग, उग्र हो रहा जनाक्रोश

अब हजारीबाग और बरही के स्थानीय लोगों का धैर्य जवाब दे रहा है. जनता की मांग है कि पुलिस केवल मोहरों को जेल भेजने के बजाय इस रैकेट की ‘आर्थिक रीढ़’ पर हमला करे. इस पूरे सिंडिकेट की मनी ट्रेल और कॉल डिटेल्स खंगाली जाएं. राज्य सरकार और पुलिस के आला अधिकारियों को समय रहते इस रूट पर बड़ा ऑपरेशन चलाना होगा, वरना यह सिंडिकेट आने वाले दिनों में इलाके की कानून-व्यवस्था के लिए नासूर बन जाएगा.

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