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बालूमाथ: मनरेगा डोभा योजना में करोड़ों की अवैध वसूली का आरोप

Latehar: जिले के बालूमाथ प्रखंड में मनरेगा योजना के तहत डोभा पास कराने के नाम पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और अवैध...

Latehar: जिले के बालूमाथ प्रखंड में मनरेगा योजना के तहत डोभा पास कराने के नाम पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और अवैध वसूली का मामला सामने आया है. ग्रामीणों का आरोप है कि योजना स्वीकृत कराने के लिए प्रत्येक लाभुक से लगभग ₹20,000 तक की राशि ली जा रही है.

पैसा नहीं तो योजना नहीं

ग्रामीणों का कहना है कि यदि पैसा नहीं दिया जाता है तो मनरेगा योजना पास नहीं की जाती. इस कारण गरीब और मजदूर परिवारों को मजबूरी में पैसे देने पड़ रहे हैं.

UPI से वसूली के आरोप, डिजिटल सबूत मौजूद

सूत्रों के अनुसार कई ग्रामीणों से ऑनलाइन यानी UPI के माध्यम से भी पैसे लिए गए हैं. कुछ मामलों में ₹70,000 तक की राशि अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किए जाने के डिजिटल रिकॉर्ड और स्क्रीनशॉट मौजूद होने की बात कही जा रही है.

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पैसा लेने के बाद भी काम शुरू नहीं

ग्रामीणों का आरोप है कि कई मामलों में पैसा लेने के बावजूद 3 से 4 महीने तक योजना शुरू नहीं की गई. जब इस संबंध में पूछताछ की गई तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला.

दलालों के जरिए कैश वसूली

ग्रामीणों का कहना है कि इस पूरे मामले में कुछ दलाल और बिचौलिये सक्रिय हैं. जिनके माध्यम से कई लोगों से नकद में भी पैसे लिए गए. बताया जा रहा है कि इस संबंध में ऑडियो. वीडियो रिकॉर्डिंग और अन्य साक्ष्य भी मौजूद हैं.

13 पंचायतों में 1067 योजनाएं दर्ज

मनरेगा पोर्टल के अनुसार बालूमाथ प्रखंड की 13 पंचायतों में कुल 1067 योजनाएं दर्ज हैं. यदि प्रत्येक योजना से ₹20,000 की वसूली की गई हो. तो अनुमानित अवैध वसूली लगभग ₹2,13,40,000 यानी दो करोड़ तेरह लाख चालीस हजार रुपये तक पहुंच सकती है.

संगठित नेटवर्क की आशंका

ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है. बल्कि इसमें एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा है. जिसमें पंचायत से लेकर प्रखंड स्तर तक कुछ लोगों की संलिप्तता होने की आशंका जताई जा रही है.

जांच की मांग हुई तेज

ग्रामीणों ने कहा है कि मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना में इस तरह का भ्रष्टाचार गरीबों के अधिकारों के साथ बड़ा अन्याय है. यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए. तो करोड़ों रुपये के घोटाले का खुलासा हो सकता है.

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