Jamtara: में चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था की एक और दर्दनाक तस्वीर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के विधानसभा क्षेत्र जामताड़ा में देखने को मिली. यहां समय पर एंबुलेंस सेवा उपलब्ध नहीं होने के कारण एक मरीज को खटिया पर लादकर ट्रैक्टर से अस्पताल ले जाना पड़ा. लेकिन अस्पताल पहुंचने में हुई देरी के कारण मरीज की मौत हो गई. घटना शुक्रवार रात करीब 8 बजे की बताई जा रही है. इस घटना के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था और 108 एंबुलेंस सेवा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
कॉल रिसीव तक नहीं किया गया
जानकारी के अनुसार, जामताड़ा प्रखंड के शहरबेरा गांव निवासी 43 वर्षीय मोनू टुडू की अचानक तबीयत बिगड़ गई. परिजनों ने तत्काल 108 एंबुलेंस सेवा पर कॉल किया, लेकिन काफी देर तक कोई सहायता नहीं मिली. परिजनों का आरोप है कि कॉल रिसीव तक नहीं किया गया. मरीज की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी, जिसके बाद मजबूरी में ग्रामीणों की मदद से मोनू टुडू को खटिया पर लादकर ट्रैक्टर के माध्यम से सदर अस्पताल लाया गया. लेकिन अस्पताल पहुंचने में हुई देरी के कारण डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. मृतक की पत्नी और ग्रामीणों ने बताया कि यदि समय पर एंबुलेंस मिल जाती तो शायद मोनू टुडू की जान बच सकती थी. घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है.

सहिया मीणा मुर्मू का बयान
सहिया मीणा मुर्मू ने बताया कि मोनू टुडू की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी. इसके बाद 108 एंबुलेंस सेवा को कॉल किया गया. उन्होंने बताया कि रात करीब 8:40 बजे कॉल किया गया था. फोन में रिंग तो हुआ, लेकिन किसी ने कॉल रिसीव नहीं किया. गांव की सड़क भी काफी खराब है और रात का समय होने के कारण मरीज को ट्रैक्टर से अस्पताल लाना पड़ा.
पोती रूपलता हांसदा की पीड़ा
मृतक की पोती रूपलता हांसदा ने भावुक होकर कहा कि स्वास्थ्य मंत्री के जिले में ही लोगों को एंबुलेंस जैसी बुनियादी सुविधा नहीं मिल पा रही है. उन्होंने कहा कि एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण ही उनके दादाजी की मौत हुई है. आधार कार्ड के अनुसार मृतक मोनू टुडू की उम्र 43 वर्ष बताई जा रही है.
सिविल सर्जन का बयान
इस मामले में सिविल सर्जन डॉ. शिव प्रसाद ने स्वीकार किया कि जिले में एंबुलेंस की भारी कमी है. उन्होंने बताया कि जिले में कुल 13 एंबुलेंस हैं, जिनमें से केवल 5 ही चालू हालत में हैं जबकि 8 एंबुलेंस खराब पड़ी हैं. उन्होंने कहा कि कई एंबुलेंस छोटी-छोटी तकनीकी खराबियों के कारण बंद हैं, लेकिन संबंधित एजेंसी समय पर मरम्मत नहीं करा रही है. इस संबंध में विभाग और एजेंसी दोनों को पत्र लिखा गया है. घटना के बाद ग्रामीणों और परिजनों में स्वास्थ्य विभाग के प्रति भारी नाराजगी देखी जा रही है. लोगों का कहना है कि यदि स्वास्थ्य व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं हुआ तो इस तरह की घटनाएं आगे भी होती रहेंगी.
