News Wave Desk: 22 जून 2026 को सूर्य देव मृगशिरा नक्षत्र से निकलकर आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश कर चुके हैं. आम बोलचाल की भाषा में इसे ‘आदरा’ या ‘अरदरा’ भी कहा जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार आर्द्रा नक्षत्र के अधिष्ठाता देव भगवान रुद्र (शिव) हैं, जबकि इसके स्वामी राहु माने जाते हैं. धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ बिहार, पूर्वांचल और मिथिलांचल के ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस नक्षत्र का विशेष सांस्कृतिक और कृषि महत्व है.
क्या है आर्द्रा नक्षत्र?
आर्द्रा आकाशमंडल का छठा नक्षत्र माना जाता है. संस्कृत में ‘आर्द्रा’ का अर्थ ‘नम’ या ‘नमी से युक्त’ होता है. मान्यता है कि जब सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तब धरती नए सृजन और कृषि कार्यों के लिए तैयार होती है. यही कारण है कि इस अवधि को भीषण गर्मी के अंत और वर्षा ऋतु की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है.

किसानों के लिए क्यों है खास?
आर्द्रा नक्षत्र के आगमन के साथ ही मानसून की सक्रियता बढ़ने लगती है. मिथिलांचल सहित कई कृषि प्रधान क्षेत्रों में किसान इसी समय धान की रोपाई और बुवाई की शुरुआत करते हैं. खेतों में नई फसल की तैयारी शुरू होने से यह समय किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.
आर्द्रा नक्षत्र में आम खाने की परंपरा
आर्द्रा नक्षत्र के दौरान आम खाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है. मान्यता है कि इस समय तक मानसून की शुरुआती बारिश हो चुकी होती है और आम पूरी तरह प्राकृतिक रूप से पक जाते हैं. इसलिए इन्हें स्वाद और स्वास्थ्य दोनों दृष्टि से लाभकारी माना जाता है.
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पाचन के लिए बेहतर माने जाते हैं आम
लोक मान्यताओं के अनुसार आर्द्रा नक्षत्र से पहले अधिक मात्रा में आम खाने से शरीर में गर्मी बढ़ सकती है, जबकि इस समय पके हुए आम अपेक्षाकृत अधिक सुपाच्य होते हैं और शरीर को मौसम परिवर्तन के अनुरूप ढालने में मदद करते हैं.
खीर-पूड़ी और आम का विशेष महत्व
बिहार और मिथिलांचल में आर्द्रा नक्षत्र के अवसर पर आम, खीर और पूड़ी खाने की विशेष परंपरा है. माना जाता है कि यह भोजन बदलते मौसम में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने और स्वास्थ्य को संतुलित रखने में सहायक होता है.
धार्मिक, सांस्कृतिक और कृषि परंपराओं का संगम
आर्द्रा नक्षत्र केवल एक ज्योतिषीय घटना नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, खेती-किसानी और भारतीय लोक परंपराओं से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अवसर भी है. वर्षा ऋतु के स्वागत और नई कृषि चक्र की शुरुआत के साथ यह दिन ग्रामीण जीवन में उत्सव का माहौल लेकर आता है.


