Giridih: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के 73वें बलिदान दिवस पर गिरिडीह जिले के तिसरी प्रखंड अंतर्गत चंदौरी मंडल में उनकी तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी. इस मौके पर उन्होंने डॉ. मुखर्जी के योगदान को याद करते हुए कहा कि राष्ट्र की एकता, अखंडता और स्वाभिमान के लिए उनका संघर्ष भारतीय इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है.
डॉ. मुखर्जी का संघर्ष और बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा
मरांडी ने कहा कि देश के हालात और कांग्रेस की तुष्टिकरण की राजनीति को देखकर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कुलपति का पद छोड़ राजनीति का रास्ता चुना था. उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के पूर्ण एकीकरण के लिए डॉ. मुखर्जी का संघर्ष और बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा. “एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे” का उनका संकल्प आज भी देशभक्ति और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देता है. नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने भारतीय जनसंघ की स्थापना कर देश में ‘राष्ट्र प्रथम’ की राजनीति की नींव रखी. उन्होंने जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बनाए रखने के लिए अपने प्राणों तक का बलिदान दिया, लेकिन अपने सिद्धांतों और आदर्शों से कभी समझौता नहीं किया.

मरांडी ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्शों को आत्मसात कर ही विकसित भारत की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि भाजपा का एक-एक कार्यकर्ता उनकी नीतियों और राष्ट्रसेवा के संकल्प को लेकर पूरी निष्ठा के साथ देशसेवा में जुटा है.
यह भी पढ़ें: कोडरमा: मुहर्रम को लेकर पुलिस अलर्ट, SP ने जयनगर और चंदवारा क्षेत्र के संवेदनशील स्थानों का किया निरीक्षण


