Ranchi: बिहार से झारखंड को अलग हुए 25 साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन दोनों राज्यों के बीच काम और दायित्वों के बंटवारे का मामला आज भी पूरी तरह नहीं सुलझ सका है. आगामी सात जुलाई को ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में प्रस्तावित पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में एक बार फिर यह मुद्दा जोर-शोर से उठेगा. इस महत्वपूर्ण बैठक में झारखंड सरकार अपने हक और लंबित मामलों को मजबूती से रखने की तैयारी में जुट गई है.
झारखंड ने शुरू की तैयारी, गृह सचिव ने की समीक्षा बैठक:
भुवनेश्वर में होने वाली इस उच्च स्तरीय बैठक में झारखंड की ओर से कौन-कौन से बिंदु उठाए जाएंगे, इसे लेकर राज्य सरकार गंभीर है. गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की प्रधान सचिव वंदना दादेल ने गुरुवार को अपने अधीनस्थ अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की थी. इस बैठक में उन्होंने बिहार के साथ चल रहे तमाम विवादों और लंबित फाइलों की वर्तमान स्थिति की विस्तृत जानकारी ली और एजेंडा तय करने के निर्देश दिए.
बैठक में उठेंगे ये 5 मुख्य एजेंडे:
– संपत्ति व पेंशन विवाद: बंटवारे के बाद से दोनों राज्यों के बीच परिसंपत्तियों और सरकारी कर्मचारियों के पेंशन दायित्वों का वित्तीय विवाद अब भी लंबित है.
– अंतरराज्यीय जल विवाद: नदियों के पानी के बंटवारे और सिंचाई परियोजनाओं को लेकर दोनों राज्यों के बीच समन्वय की कमी को दूर करने पर चर्चा होगी
– सीमा सुरक्षा व विवाद: बिहार और झारखंड की सीमाओं से जुड़े कुछ इलाकों में प्रशासनिक और भौगोलिक स्पष्टता को लेकर बात की जाएगी.
– सुरक्षा व कानून व्यवस्था: दोनों राज्यों की भौगोलिक सीमाओं पर अपराध नियंत्रण और बेहतर पुलिसिंग के लिए आपसी सहयोग पर रणनीति बनेगी.
– माओवाद विरोधी अभियान: झारखंड की सीमा से सटे पड़ोसी राज्यों (बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल) के साथ मिलकर नक्सलियों और माओवादियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों में आपसी तालमेल को और मजबूत किया जाएगा.
क्या है पूर्वी क्षेत्रीय परिषद और क्यों है अहम?
पूर्वी क्षेत्रीय परिषद एक ऐसा महत्वपूर्ण मंच है जो राज्यों के बीच के आपसी विवादों को सुलझाने और बेहतर समन्वय स्थापित करने में बड़ी भूमिका निभाता है. इस परिषद की बैठक में मुख्य रूप से चार राज्यों के मुख्यमंत्री और शीर्ष अधिकारी शामिल होते हैं जिनमें बिहार, झारखंड ओडिशा और पश्चिम बंगाल शामिल है.



