Bokaro: शनिवार को बोकारो पुलिस ने चोरी व खोया हुआ मोबाइल वापस कर अपनी पीठ थप-थपाई. इसी क्रम में जब्त मोबाइल प्राप्ति के बाद सिटी थाना परिसर में हुई 19 अप्रैल की घटना को लेकर वायरल वीडियो ने पुलिस के कार्यशैली पर ही सवालिया निशान लगा दिया. वायरल वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है. वायरल वीडियो में पुलिस द्वारा फरियादी को जबरन हिरासत में लेने का दावा किया जा रहा है. इस वीडियो के वायरल होने के बाद सिटी उपाधिक्षक आलोक रंजन ने जांच में इस वीडियो को पूरी तरह गलत साबित होने का दावा किया. उन्होंने कहा कि पीड़ित’ ही वास्तव में दोषी था, जिसे कानूनी कार्रवाई के तहत गिरफ्तार किया गया.
दो पक्षों के बीच मारपीट का मामला
सिटी डीएसपी आलोक रंजन ने बताया कि 19 अप्रैल 2026 को दुन्दीबाग स्थित केतारी गली में मारपीट की घटना हुई थी. दो पक्षों के बीच मारपीट के बाद एक पक्ष के 7-8 लोग थाने पहुंचे, जिनमें से एक करण कुमार को सिर में हल्की चोट लगी थी. उसे ओपीडी पदाधिकारी सदर अस्पताल भेज रहे थे, तभी सूचना मिली कि इन्हीं लोगों ने दूसरे पक्ष के देव कुमार साव को चाकू से गला और छाती पर गोदकर गंभीर रूप से घायल कर दिया है. देव कुमार की हालत नाजुक होने पर उन्हें सदर अस्पताल से बीजीएच रेफर किया गया है.

थाने में मौजूद लोगों को इसकी भनक लगते ही गिरफ्तारी के डर से भागने की कोशिश की. पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो हंगामा मच गया. साथ आई महिलाओं ने भी अपने करीबियों को छुड़ाने का प्रयास किया. वीडियो बनाना भी शुरू कर दिया. काफी मशक्कत के बाद दोषी हरेराम साव और करण साव को वादी ज्ञानचंद्र साव के तहरीर पर केस संख्या-72/2026 दर्ज कर 20 अप्रैल को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.
पुलिस के अनुसार इन लोगों ने सदर अस्पताल में भी हंगामा किया. थाने में पुलिस के साथ अभद्र व्यवहार और हंगामे के लिए बीएस सिटी थाना में एक मामला दर्ज किया गया. डीएसपी ने कहा कि वायरल वीडियो को भ्रामक बताते हुए पुलिस द्वारा पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन किए जाने की बात कही.
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