Ranchi: बोकारो की नाबालिक लड़की लापता मामले में मां उषा झा द्वारा दायर हेवियस कार्पस याचिका पर सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद एवं न्यायाधीश संजय प्रसाद की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंपने के विकल्प पर जोर देते हुए कहा कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) एवं अपराध अनुसंधान विभाग (CID) दोनों नाबालिग को ढूंढने में तालमेल बिठाए, इसके साथ ही अब मामले में CBI की एंट्री हो चुकी है.
CBI को बनाया गया पार्टी, दोनों एजेंसियां मिलकर करेंगी जांच
अदालत ने ASGI प्रशांत पल्लव को दिशा निर्देश जारी करते हुए CBI को पार्टी बनाया है, अब दोनों जांच एजेंसी CBI एवं CID नाबालिग को ढूंढेंगी, अदालत में दोनों एजेंसियों को तालमेल बैठाने का आदेश दिया है और जल्द से जल्द नाबालिग को ढूंढने का आदेश दिया है.

कोर्ट में मौजूद रही CID और SIT की टीम
इस दौरान अदालत में CID ADG समेत SIT की टीम मौजूद रही मौके पर जांच के लिए गठित CID की टीम नेतृत्व कर रहे DSP ने अदालत को बताया कि e -kyc के मिलन के दौरान एक लड़की का चेहरा 90% तक मैच हुआ है इस पर अदालत ने पूछा कि अगर चेहरा 90% तक मैच हुआ तो लापता नाबालिग क्यों नहीं जहां DSP ने कहा कि चेहरा के अलावा थंब और अन्य चीज मैच नहीं हो रही है इसके बाद अदालत ने पुणे से संबंधित केस का जिक्र करते हुए GAIT सॉफ्टवेयर का उपयोग करने का निर्देश दिया है.
90 फीसदी फेस मैच के बावजूद क्यों नहीं मिली नाबालिग?
दरअसल अदालत ने यह पाया कि जांच CID को सौंपे जाने के बावजूद भी स्टेट पुलिस के द्वारा किए गए अब तक अनुसंधान तक ही सीमित रही ऐसे में नाबालिग को ढूंढने में केंद्रीय जांच एजेंसी ही एक मात्रा विकल्प नजर आ रहा था मामले में अब CBI की एंट्री के सबकी नजरें CBI की जांच पर होगी बता दें कि बोकारो से अक्टूबर 2020 में नाबालिग लड़की को लापता होने की प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी पुलिस को कोई सुराग नहीं मिलने पर नाबालिग की मां ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है, याचिका दाखिल होने के बाद CID की भी एंट्री हुई लेकिन कोई सुराग नहीं मिल पाया, मामले में अदालत CBI को पार्टी बनाया है, यहां गौर करने वाली बात है कि यह मामला भी बोकारो के पिंडराजोरा थाना का है जहां से पुष्पा का मामला भी जुड़ा है जिसका कंकाल SIT ने बरामद किया था, मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने CBI को जिम्मा सौंपा है.


